हाजीपुर नाव हादसा: गंगा में डूबी नाव, 13 बच्चों की मौत; बचे बच्चों ने सुनाई आपबीती, बोले- नाव में छेद था
हाजीपुर: बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी पर हुआ नाव हादसा कई परिवारों के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की रात राघोपुर दियारा क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के पास नाव पलटने से कम से कम 13 बच्चों की मौत हो गई। बुधवार, 14 अक्टूबर को जीवित बचे बच्चों ने हादसे की भयावह परिस्थितियों के बारे में बताया। उनके अनुसार, नाव में पहले से छेद था। उसमें पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव डूब गई। कुछ बच्चों ने लकड़ी का सहारा लेकर अपनी जान बचाई।
हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है। प्रशासन ने बचाव अभियान चलाया है और लापरवाही की आशंका को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
Hajipur Boat Accident: कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8:30 बजे गांव के लोग गंगा नदी पार करके दूसरे गांव में आयोजित भोज में शामिल होने जा रहे थे। नाव पर बच्चे और अन्य लोग सवार थे। यात्रियों की वास्तविक संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
नदी के बीच पहुंचने पर नाव में पानी भरने लगा और वह पलट गई। इसके बाद नाव पर सवार लोग पानी में डूबने लगे। स्थानीय लोगों ने बचाव की कोशिश की और प्रशासन को सूचना दी। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम ने स्थानीय गोताखोरों के साथ खोज एवं बचाव अभियान चलाया।
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के अनुसार, हादसे में 13 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई। मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल बताए गए हैं। छह लोगों को बचाकर पटना के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई गई।
नाव में छेद था, लकड़ी पकड़कर बचाई जान
हादसे से बचकर निकले बच्चों ने बताया कि नाव में छेद होने के कारण उसमें पानी भरने लगा था। पानी बढ़ने पर नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में पलट गई।
एक जीवित बचे बच्चे अजीत ने बताया कि नाव डूबने के बाद उसने लकड़ी को पकड़ लिया, जिससे वह बाहर निकलने में सफल रहा। दूसरे बच्चों ने भी नाव में पानी भरने और डूबने के दौरान मची अफरा-तफरी के बारे में जानकारी दी।
इन बयानों ने नाव की स्थिति और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, दुर्घटना के सटीक कारण और संभावित तकनीकी खामियों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
प्रशासन ने अधिकारियों के वेतन पर लगाई रोक
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने राघोपुर के अंचल अधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) से स्पष्टीकरण मांगा है। जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश भी दिया है।
प्रशासन के अनुसार, नाव निजी तौर पर पंजीकृत थी और उसके मालिक तथा संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हादसे की परिस्थितियों, नाव की स्थिति और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की जा रही है।
मृतकों के परिवारों को सहायता का ऐलान
हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शोक व्यक्त किया। केंद्र की ओर से मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई। बिहार सरकार ने भी मृतकों के परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता घोषित की।
हादसे ने उठाए नदी परिवहन की सुरक्षा पर सवाल
वैशाली की यह दुर्घटना ग्रामीण क्षेत्रों में नदी पार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली नावों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नाव की स्थिति, क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता जैसे मुद्दे जांच के केंद्र में रहेंगे।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इस त्रासदी ने कई परिवारों को गहरे शोक में डाल दिया है और नदी परिवहन में सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत फिर सामने आई है।

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