आमदार गोपीचंद पडळकर को हाईकोर्ट का झटका, सांगली जिला बैंक चुनाव से बाहर; जानें क्या है पूरा मामला

मुंबई/सांगली: महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा विधायक गोपीचंद पडळकर को बड़ा झटका लगा है। सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के निदेशक मंडल के चुनाव में मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने उनकी उम्मीदवारी को अवैध करार दिया है। इस फैसले से जिले की सहकारी बैंक राजनीति में चुनावी समीकरण बदल गए हैं। पडळकर को भाजपा और महायुति का प्रमुख चेहरा माना जा रहा था, इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द होने को गठबंधन के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

Gopichand Padalkar - आमदार गोपीचंद पडळकरांना मोठा झटका, महायुतीच्या मनसुब्यांनाही सुरुंग - Gopichand Padalkar Sangli District Bank Election Nomination Invalid marathi news - MumbaiTak

13 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस फैसले के बाद अब सवाल उठ रहा है कि भाजपा और महायुति जिला बैंक चुनाव में अपनी रणनीति कैसे बदलेंगी। वहीं, विपक्षी नेताओं ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है।

आमदार गोपीचंद पडळकर का नामांकन क्यों हुआ रद्द?

गोपीचंद पडळकर ने सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में जत तालुका की ‘अ’ वर्ग सोसायटी सीट से उम्मीदवार बनने के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके नामांकन की वैधता को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक विक्रम सावंत और कृषि उपज बाजार समिति के पूर्व सभापति सुजय शिंदे ने अदालत में याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पडळकर संबंधित सहकारी संस्था की सदस्यता और प्रबंधन समिति में अनुभव से जुड़ी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते थे। बैंक के उपनियमों के अनुसार, संबंधित संस्था की कम से कम दो साल की सदस्यता और सहकारी संस्था की प्रबंधन समिति में कम से कम एक साल का अनुभव आवश्यक बताया गया था।

Gopichand Padalkar Sangli District Bank Election Disqualified | High Court

याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि पडळकर ने 20 फरवरी 2026 को कुनिकोणूर गांव में जमीन खरीदी थी, तो इससे पहले उन्हें संबंधित सोसायटी की सदस्यता किस आधार पर मिली थी। इसके अलावा, निंबवडे ग्रामीण गैर-कृषि ऋण संस्था में उनके निदेशक पद के अनुभव की वैधता पर भी आपत्ति जताई गई थी।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को स्वीकार करते हुए उनकी उम्मीदवारी को अवैध ठहराया। इससे पहले निर्वाचन अधिकारी ने आपत्तियां खारिज कर उनका नामांकन वैध माना था।

भाजपा और महायुति की रणनीति पर क्या पड़ेगा असर?

सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में 21 सीटें हैं। इस चुनाव में भाजपा, शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट और अन्य सहयोगी संगठनों ने मिलकर महायुति के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी की थी।

पडळकर को इस चुनाव में भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिना जा रहा था। उनके मैदान से बाहर होने के बाद गठबंधन के लिए सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर दोबारा विचार करने की स्थिति बन सकती है।

भाजपा विधायक सुरेश खाडे का नामांकन भी पहले चरण में अवैध ठहराया गया था। ऐसे में सांगली जिला बैंक चुनाव में भाजपा की रणनीति को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, इस फैसले से पूरे गठबंधन की हार या बैंक पर विपक्ष का नियंत्रण तय हो गया है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। अंतिम नतीजे उम्मीदवारों, चुनावी समझौतों और मतदान की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

विक्रम सावंत ने फैसले का स्वागत किया

याचिका दाखिल करने वाले पूर्व विधायक विक्रम सावंत ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने नियमों और पात्रता से जुड़े सवालों पर उचित निर्णय दिया है। उन्होंने कथित तौर पर गलत दस्तावेज उपलब्ध कराने में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

दूसरी ओर, पडळकर की उम्मीदवारी रद्द होने के बाद उनकी अगली कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर नजर बनी हुई है। उनके आगे के कदम और महायुति नेतृत्व का निर्णय सांगली जिला बैंक चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

आगे क्या होगा?

नामांकन रद्द होने के बाद अब चुनाव में उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति और गठबंधन के बीच सहमति पर ध्यान रहेगा। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 20 अक्टूबर 2026 बताई गई है। इस अवधि में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और संभावित चुनावी समझौतों से तस्वीर बदल सकती है।

फिलहाल, हाईकोर्ट का फैसला गोपीचंद पडळकर के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है। सांगली जिला बैंक चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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By Kanchan

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