फ्रांस में छात्र आंदोलन तेज, 500 स्कूलों तक पढ़ाई प्रभावित; शिक्षा व्यवस्था से लेकर असमानता तक उठे सवाल

फ्रांस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब केवल स्कूलों की बदहाल स्थिति तक सीमित नहीं रहा है। शिक्षक की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, जर्जर इमारतें, अपर्याप्त सुविधाएं और शिक्षा में बढ़ती असमानता के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब देशव्यापी राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया है। 6 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों ने नया रूप लिया, जब छात्र संगठनों के आह्वान पर देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए।

500 तक स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित

फ्रांस में हिंसक छात्र आंदोलन के बाद 500 स्कूल बंद, 24 विद्यालयों में तोड़फोड़; पांच हजार से ज्यादा लोग हिरासत में - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan

फ्रांस के शिक्षा मंत्री के अनुसार, 5 अक्टूबर को करीब 400 से 500 माध्यमिक विद्यालय पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे। कई जगह छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश द्वारों पर कचरे के डिब्बे रखकर रास्ते रोके और कक्षाओं का बहिष्कार किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक भी हुए और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं।

प्रदर्शनों के दौरान स्कूलों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। हालांकि आंदोलन का मूल मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी और छात्रों की खराब परिस्थितियों को बताया जा रहा है।

भीड़भाड़ वाली कक्षाओं से शिक्षक की कमी तक

छात्रों और शिक्षकों की सबसे बड़ी शिकायतों में कक्षाओं में छात्रों की अधिक संख्या, पर्याप्त शिक्षकों की कमी और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह समय पर दूसरे शिक्षक उपलब्ध न होना शामिल है। कुछ विद्यालयों में नर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं की कमी की समस्या भी सामने आई है।

स्कूल भवनों की खराब हालत भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा है। कई छात्रों ने पुराने और जर्जर भवनों, खराब सुविधाओं और गर्मी के दौरान अत्यधिक तापमान वाली कक्षाओं को लेकर नाराजगी जताई है।

फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि सार्वजनिक माध्यमिक विद्यालयों में कुल शिक्षण घंटों का 9.8 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध नहीं हो पाया। इनमें 7.5 प्रतिशत समय अनुपस्थित शिक्षकों की जगह व्यवस्था न होने और 2.3 प्रतिशत समय स्कूल बंद रहने के कारण प्रभावित हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि छात्रों की शिकायतें केवल तत्काल विरोध की प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में मौजूद लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक समस्याओं से जुड़ी हैं।

शिक्षा से आगे बढ़ा आंदोलन

फ्रांस का मौजूदा छात्र आंदोलन अब व्यापक सामाजिक असंतोष से भी जुड़ गया है। खासकर गरीब और वंचित इलाकों के छात्रों का कहना है कि उनके क्षेत्र के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और अवसर नहीं मिलते। इससे शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक और आर्थिक असमानता का सवाल भी सामने आया है।

500 secondary schools closed in France due to student protests-m.khaskhabar.com

प्रदर्शनों में प्रवासन, पहचान की राजनीति, सरकारी खर्च और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर चल रही बहसों की छाया भी दिखाई दे रही है। यही कारण है कि छात्र आंदोलन को अब केवल शिक्षा नीति का मुद्दा नहीं माना जा रहा।

आगामी चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक महत्व

फ्रांस में 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और मौजूदा राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। ऐसे समय में युवाओं के बीच बढ़ता असंतोष राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

फ्रांस में युवाओं की चुनावी भागीदारी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। यदि शिक्षा, रोजगार, महंगाई और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे युवाओं को बड़े पैमाने पर राजनीतिक रूप से सक्रिय करते हैं, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। दक्षिणपंथ और वामपंथ दोनों ही इस असंतोष को अपने राजनीतिक विमर्श से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

सरकार के सामने अब चुनौती केवल स्कूलों को दोबारा सामान्य रूप से चलाने की नहीं है। उसे शिक्षक भर्ती, स्कूलों के बुनियादी ढांचे, कक्षा के आकार और वंचित इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता जैसे सवालों पर ठोस कदम उठाने होंगे।

France Student Protests: छात्रों का आंदोलन देशभर में फैला, 500 स्कूल बंद

साथ ही, हिंसक घटनाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान भी जरूरी है। केवल प्रदर्शन रोकने से समस्या खत्म नहीं होगी। छात्रों की शिकायतों को सुनकर दीर्घकालिक सुधार लागू करना ही इस संकट का स्थायी रास्ता हो सकता है।

आगे का रास्ता

फ्रांस को सार्वजनिक शिक्षा में लगातार निवेश बढ़ाने के साथ पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की भर्ती करनी होगी। पुराने स्कूल भवनों का नवीनीकरण, नर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपलब्धता तथा कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त सहायता भी जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा को केवल बजट का खर्च नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और भविष्य की मानव पूंजी में निवेश के रूप में देखा जाए। फ्रांस का मौजूदा छात्रआंदोलन इसी बड़े सवाल की ओर संकेत कर रहा है कि अगर सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती है, तो उसका असर केवल कक्षाओं तक नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राजनीति पर पड़ता है।

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By Kanchan

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