‘बर्थडे गर्ल’ लवलीना का स्वर्णिम पंच: एशियन गेम्स में चीन की बॉक्सर को 5-0 से धूल चटाकर जीता GOLD; मैरी कॉम के बाद इतिहास रचने वाली दूसरी भारतीय महिला
जापान के निशियो में 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में रचा इतिहास; 29वें जन्मदिन पर भारत को दिया गोल्ड मेडल का तोहफा, महिला मुक्केबाजी में 12 साल बाद मिला स्वर्ण।
जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे 18वें एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) के 14वें दिन भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। 2 अक्टूबर 2026 को अपने 29वें जन्मदिन के खास मौके पर लवलीना ने महिलाओं की 75 किग्रा मुक्केबाजी स्पर्धा के फाइनल में चीन की आक्रामक बॉक्सर बाओ जियी (Bao Ziyi) को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले (Unanimous Decision) से हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम जीत के साथ ही लवलीना एशियन गेम्स के इतिहास में मुक्केबाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की महज दूसरी महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
लवलीना की इस ऐतिहासिक सफलता ने एशियन गेम्स में भारतीय महिला बॉक्सिंग के 12 साल लंबे स्वर्ण पदक के सूखे को खत्म कर दिया है। इससे पहले वर्ष 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में दिग्गज बॉक्सर एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) ने 51 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता था। 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली असम के गोलाघाट की लवलीना ने इस बार अपने पदक का रंग बदलकर गोल्ड में तब्दील कर दिया। उनकी इस जीत के साथ एशियन गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या 70 (12 स्वर्ण, 24 रजत, 34 कांस्य) तक पहुंच गई है।
1. रिंग में संयम और ‘काउंटर-पंच’ का जादू: कैसे दी चीनी बॉक्सर को मात?
जापान के निशियो जिम्नैशियम (Nishio Gymnasium) में खेले गए फाइनल मुकाबले में लवलीना की रणनीति बेहद सटीक रही:
- पहला राउंड (3-2 से बढ़त): चीनी खिलाड़ी बाओ जियी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और घूंसों की बौछार कर दी। लेकिन लवलीना ने धैर्य बनाए रखा और सटीक ‘काउंटर-पंच’ मारकर पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया।
- दूसरा राउंड (4-1 से दबदबा): दूसरे राउंड में लवलीना का आत्मविश्वास और बढ़ा। उन्होंने बाओ के हमलों से बचते हुए दूर से ही लंबे क्लीयर पंचेज जड़े और जजों के स्कोरकार्ड पर 4-1 से मजबूत बढ़त बना ली।
- तीसरा राउंड (5-0 से एकतरफा जीत): आखिरी राउंड में जब बाओ पर वापसी का दबाव था, तब लवलीना ने रिंग में अपनी पोजिशन बनाए रखी और जजों के 5-0 के सर्वसम्मत फैसले के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
2. लवलीना बोरगोहेन का स्वर्णिम करियर और रिकॉर्ड्स
लवलीना की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल उपलब्धियां:
| प्रतियोगिता (Tournament) | वर्ग / श्रेणी (Category) | पदक / स्थान (Medal / Achievement) |
|---|---|---|
| एशियन गेम्स 2026 (नागोया) | 75 किग्रा महिला मुक्केबाजी | स्वर्ण पदक (Gold Medal – 5-0 vs China) |
| हांगझोऊ एशियन गेम्स 2022 | 75 किग्रा महिला मुक्केबाजी | रजत पदक (Silver Medal) |
| टोक्यो ओलंपिक 2020 (2021) | 69 किग्रा वेलटरवेट | कांस्य पदक (Bronze Medal – ओलंपिक इतिहास में केवल 3rd भारतीय बॉक्सर) |
| विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 2023 | 75 किग्रा महिला मुक्केबाजी | स्वर्ण पदक (World Champion) |
| राष्ट्रीय खेल पुरस्कार | खेल में उत्कृष्टता | अर्जुन पुरस्कार (2020) व मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2021) |
3. जन्मदिन पर सबसे बड़ा तोहफा: देश भर में जश्न का माहौल
2 अक्टूबर 1997 को जन्मीं लवलीना के लिए यह जीत दोहरी खुशी लेकर आई:
- प्रधानमंत्री और खेल मंत्री की बधाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्रालय (SAI) ने लवलीना को बधाई देते हुए उनके जज्बे को नमन किया। पीएम ने कहा कि लवलीना का यह प्रदर्शन देश की युवा बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देगा।
- असम में जश्न: लवलीना के गृह राज्य असम और गोलाघाट जिले में आतिशबाजी और मिठाइयां बांटकर उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया गया।
- अगला लक्ष्य: पेरिस और आगामी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहराने के बाद लवलीना का अब पूरा ध्यान वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष स्थान बनाए रखने पर है।
निष्कर्ष
लवलीना बोरगोहेन की यह स्वर्णिम सफलता केवल एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय खेल जगत की निरंतर बढ़ती ताकत का प्रतीक है। अपने जन्मदिन पर चीन की मजबूत बॉक्सर को रिंग में धूल चटाकर गोल्ड जीतना और मैरी कॉम के 12 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी करना यह साबित करता है कि लवलीना भारतीय मुक्केबाजी की नई ध्वजवाहक हैं।

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