बडगाम में सुरक्षा बलों का बड़ा धमाका: ‘ऑपरेशन कोराग’ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर ‘हाशिम मूसा’ ढेर; आतंकियों के नेटवर्क को करारा झटका
सेना, पुलिस और सीआरपीएफ का बडगाम के जंगलों में संयुक्त ऑपरेशन; पुंछ-राजौरी में कई हमलों का मास्टरमाइंड था मारा गया पाकिस्तानी आतंकी।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग-दूधपत्री (Palmaidan) के ऊंचे पहाड़ी व जंगली इलाकों में 29-30 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि चलाए गए ‘ऑपरेशन कोराग’ (Operation Korag) में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मोस्ट वांटेड टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ ‘हाशिम मूसा’ (फौजी मूसा) को मार गिराया है। भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के इस संयुक्त ऑपरेशन में आतंकी के पास से भारी मात्रा में हथियार और युद्ध सामग्री (War-like Stores) बरामद की गई है।
खुफिया एजेंसियों से यूसमर्ग के पास कोराग क्षेत्र में लश्कर आतंकियों की आवाजाही का सटीक इनपुट मिला था। इसके बाद सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया। खुद को घिरता देख झाड़ियों में छिपे आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने लश्कर के शीर्ष कमांडर हाशिम मूसा को मौके पर ही ढेर कर दिया। उल्लेखनीय है कि मूसा 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई एक मुठभेड़ में बाल-बाल बच निकला था, जिसमें उसका करीबी सहयोगी और पाकिस्तानी आतंकी ‘यासिर’ मारा गया था।
1. ‘ऑपरेशन कोराग’: बडगाम के दुर्गम जंगलों में कैसे चला सर्च ऑपरेशन?
सुरक्षा बलों ने पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के दुर्गम इलाकों में यह ऑपरेशन चलाया:
- सटीक खुफिया जानकारी पर कार्रवाई: सेना की चिनार कॉर्प्स को सूचना मिली थी कि आतंकियों का एक समूह पुंछ व शोपियां की ओर से पीर पंजाल के रास्तों से होकर बडगाम के जंगलों में पनाह लिए हुए है।
- सघन घेराबंदी और मुठभेड़: संदिग्ध हलचल दिखने पर मुस्तैद जवानों ने ललकारा, जिस पर आतंकियों ने भारी गोलीबारी की। घंटों चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने रणनीतिक बढ़त बनाते हुए मुख्य कमांडर को ढेर कर दिया।
- हथियार व गोला-बारूद बरामद: मुठभेड़ के बाद बुधवार सुबह इलाके की तलाशी के दौरान हाशिम मूसा का शव और अत्याधुनिक राइफलें, मैगजीन व गोला-बारूद बरामद हुआ।
2. पुंछ-राजौरी हमलों का मास्टरमाइंड था ‘हाशिम मूसा’
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मारा गया लश्कर कमांडर कई सालों से घाटी और जम्मू संभाग में सक्रिय था:
- पीर पंजाल बेल्ट में आतंक का पर्याय: हाशिम मूसा पुंछ, राजौरी और दक्षिण कश्मीर में भारतीय सेना के काफिलों और सुरक्षा बलों पर हुए कई घातक हमलों में मुख्य साजिशकर्ता था।
- सुरक्षा बलों के हताहतों का जिम्मेदार: उस पर सेना के वाहनों पर घात लगाकर किए गए हमलों और निर्दोष नागरिकों की लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) में शामिल होने का आरोप था।
- सितंबर में दूसरी बड़ी सफलता: 5 सितंबर को ‘ऑपरेशन अशदार’ में उसके सहयोगी यासिर के मारे जाने के बाद सुरक्षा बल लगातार मूसा का पीछा कर रहे थे।
3. ‘ऑपरेशन कोराग’ की मुख्य बिंदु व विवरण
| पहलू (Parameter) | विवरण एवं आंकड़े (Details) |
|---|---|
| ऑपरेशन का नाम | ‘ऑपरेशन कोराग’ (Operation Korag) |
| घटनास्थल (Location) | कोराग, यूसमर्ग/पालमैदान (बडगाम जिला, मध्य कश्मीर) |
| सुरक्षा बल (Joint Forces) | भारतीय सेना (Chinar Corps), J&K पुलिस, CRPF |
| मारा गया आतंकी | मोहम्मद आसिफ उर्फ ‘हाशिम मूसा’ / फौजी मूसा (लश्कर-ए-तैयबा कमांडर) |
| बरामदगी (Recovery) | शव, स्वचलित हथियार, मैगजीन और वॉर-लाइक स्टोर्स |
4. लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को कड़ा झटका और व्यापक सर्च ऑपरेशन
इस कार्रवाई से मध्य कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा:
- घाटी में नेतृत्व का संकट: हाशिम मूसा के मारे जाने से लश्कर-ए-तैयबा के स्थानीय और विदेशी कमांडरों का बचा-कुचा नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
- सर्च ऑपरेशन जारी: पीर पंजाल के घने जंगलों में छिपे अन्य संभावित आतंकियों की तलाश के लिए किश्तवाड़, डोडा, पूंछ और बडगाम के सीमावर्ती इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।
- सर्दियों से पहले घुसपैठ रोकने की तैयारी: सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा (LoC) और ऊंचे पहाड़ी दर्रों पर चौकसी बढ़ा दी है ताकि पाकिस्तान समर्थित आतंकी सर्दियों से पहले घाटी में शरण न ले सकें।
निष्कर्ष
बडगाम के यूसमर्ग जंगलों में ‘ऑपरेशन कोराग’ के तहत लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हाशिम मूसा का मारा जाना भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक विजय है। पुंछ और कश्मीर घाटी के बीच ट्रांजिट कॉरिडोर बने बडगाम के जंगलों में आतंकियों का सफाला यह साबित करता है कि सुरक्षा बलों की खुफिया व्यवस्था और त्वरित प्रहार क्षमता अभेद्य है। इस मुठभेड़ के बाद मध्य कश्मीर में लश्कर की कमर टूट गई है और आम नागरिकों में सुरक्षा व शांति का विश्वास और मजबूत हुआ है।
