बीजापुर नक्सल अभियान: बीजापुर के जंगलों में नक्सलियों का बड़ा विस्फोटक भंडार मिला, 711 ग्रेनेड लॉन्चर शेल और 900 से ज्यादा डेटोनेटर बरामद

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के पास जंगलों में छिपाकर रखे गए 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) शेल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, एक अलग तलाशी अभियान में 900 से अधिक डेटोनेटर और विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्रियां भी मिली हैं। लगातार दो दिनों में हुई इन बरामदगियों से इलाके में छिपाकर रखे गए नक्सली विस्फोटक भंडार का खुलासा हुआ है। सुरक्षा बलों ने आसपास के क्षेत्रों में तलाशी और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई तेज कर दी है।

बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, नक्सल स्मारक ध्वस्त, दो IED भी बरामद

बीजापुर नक्सल अभियान: केजी हिल्स के पास मिला 711 BGL शेल का जखीरा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 5 नवंबर 2026 को विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने बीजापुर जिले में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। इसमें जिला पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 196वीं बटालियन और कोबरा (CoBRA) की 204वीं बटालियन के जवान शामिल थे।

अभियान के दौरान उसूर थाना क्षेत्र के ताड़ापाला गांव में स्थित सुरक्षा बलों के अग्रिम परिचालन ठिकाने (FOB) के आसपास के जंगलों की तलाशी ली गई। इसी दौरान केजी हिल्स के पास जमीन में छिपाकर रखे गए 711 BGL शेल बरामद हुए। यह स्थान ताड़ापाला स्थित सुरक्षा बलों के ठिकाने से करीब डेढ़ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में है।

BGL शेल यानी बैरल ग्रेनेड लॉन्चर के गोले विस्फोटक हथियार होते हैं। इनसे सुरक्षा बलों के वाहनों, बुनियादी ढांचे और आसपास मौजूद लोगों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। बरामद सामग्री को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत कब्जे में लिया गया।

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दूसरे अभियान में 900 से ज्यादा डेटोनेटर बरामद

ग्रेनेड लॉन्चर शेल की बरामदगी के अगले दिन यानी 6 नवंबर को सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली। खुफिया सूचना के आधार पर कोबरा की 204वीं बटालियन से मिली जानकारी पर संयुक्त टीम ने बीजापुर जिले के पुजारिकांकर गांव के पास जंगल में जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया विस्फोटक सामग्री का भंडार खोज निकाला।

इस स्थान से कुल 955 डेटोनेटर मिले। इनमें 455 इलेक्ट्रिक और 500 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर शामिल हैं। इसके अलावा दो मल्टीमीटर, रेडियो सेट की बैटरी चार्जर कप, तांबे के दो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड (PCB), मल्टी-यूएसबी पोर्ट कार्ड रीडर, मोबाइल चार्जर, लैपटॉप एडाप्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद हुए हैं। मौके से नक्सली साहित्य भी मिला है।

पुलिस के अनुसार, यह सामग्री पहले से नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखी गई थी। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में इस भूमिगत भंडार का पता चला।

कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में आम लोगों को जाने से रोका

लगातार हुई विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के बाद पुलिस ने कर्रेगुट्टा और आसपास की पहाड़ियों में आम लोगों को फिलहाल नहीं जाने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि इलाके में अभी भी बारूदी सुरंग (IED) और अन्य विस्फोटक सामग्री मौजूद होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसलिए क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से बारूदी सुरंग हटाने का अभियान (डी-माइनिंग) चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य जंगल और आसपास के रास्तों को विस्फोटक खतरे से सुरक्षित बनाना है।

पहले भी कर्रेगुट्टा में चला था बड़ा नक्सल विरोधी अभियान

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियां लंबे समय तक नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में पहचानी जाती रही हैं। अप्रैल-मई 2025 में सुरक्षा बलों ने इस इलाके के घने जंगलों में 21 दिनों तक बड़ा अभियान चलाया था। इस दौरान कम से कम 31 नक्सली मारे गए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में नया सुरक्षा कैंप भी स्थापित किया था।

IED blast in Bijapur...2 soldiers of Cobra battalion injured

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 मार्च 2026 को राज्य को सशस्त्र माओवादी उपस्थिति से मुक्त घोषित किया था। इसके बावजूद जंगलों में पहले से छिपाए गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री का मिलना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।

लगातार दो दिनों में हुई इन बरामदगियों को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अब सुरक्षा बलों का जोर इलाके में बची हुई विस्फोटक सामग्री का पता लगाने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।

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द्वारा Kanchan

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