Old Monk News: ओल्ड मोंक ने FSSAI के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट से वापस ली याचिका, अब बदलेंगे बोतल के लेबल
भारत के लोकप्रिय रम ब्रांड ओल्ड मोंक (Old Monk) को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के साथ चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ओल्ड मोंक की निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। कंपनी ने अदालत को बताया कि वह अपने उत्पादों के लेबल में जरूरी बदलाव करके नए डिजाइन FSSAI के पास मंजूरी के लिए जमा करेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र में कंपनी के कुछ उत्पादों की बिक्री और वितरण पर नियामक की रोक जारी है।
5 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने कंपनी को याचिका वापस लेने की अनुमति दी। इसके साथ ही मामले को वापस ली गई याचिका के रूप में निपटा दिया गया।
Old Monk पर FSSAI ने क्यों लगाई बिक्री पर रोक?
इस पूरे विवाद की शुरुआत FSSAI द्वारा महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली स्थित ओल्ड मोंक की विनिर्माण इकाई के निरीक्षण के बाद हुई। नियामक ने पाया कि कंपनी के कुछ उत्पादों में न्यूट्रल अल्कोहल के साथ अतिरिक्त रम फ्लेवरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन उनके लेबल पर इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है।
FSSAI का कहना था कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम के रूप में बेचने के बजाय उनकी वास्तविक संरचना के अनुसार ‘रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट’ यानी रम के स्वाद वाला मादक पेय बताकर बेचा जाना चाहिए। नियामक के मुताबिक, उत्पाद की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल किए गए अतिरिक्त फ्लेवर की जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए।
इसके अलावा प्राधिकरण ने बोतलों पर लिखे ‘7 Years Old Blended’ और ‘Very Old Vatted’ जैसे दावों पर भी सवाल उठाए। इन शब्दों से उत्पाद की वास्तविक उम्र, परिपक्वता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा होने की आशंका जताई गई थी।
कंपनी ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी थी?
FSSAI की कार्रवाई के खिलाफ मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर ब्रुअरीज ने अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंपनी ने नियामक के बिक्री प्रतिबंध को चुनौती देते हुए कहा था कि उसके उत्पाद निर्धारित नियमों और लागू मानकों के अनुरूप हैं।
31 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने बोतलों के लेबल में बदलाव करने और अतिरिक्त फ्लेवर की जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने पर सहमति जताई थी। कंपनी ने सितंबर में संशोधित लेबल भी प्रस्तुत किए, लेकिन FSSAI ने उत्पाद को सामान्य रम के रूप में पेश करने पर अपनी आपत्ति बरकरार रखी।
कंपनी ने अदालत में यह भी दावा किया था कि महाराष्ट्र में बिक्री पर लगी रोक से राज्य सरकार को उत्पाद शुल्क के रूप में लगभग 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा कंपनी की ओर से अदालत में दिया गया दावा है।
क्या महाराष्ट्र में फिर शुरू होगी Old Monk की बिक्री?
हाईकोर्ट में याचिका वापस लेने का मतलब यह नहीं है कि ओल्ड मोंक की बिक्री पर लगी रोक तत्काल समाप्त हो गई है। कंपनी को अब संशोधित लेबल FSSAI के पास जमा करने होंगे। इसके बाद नियामक उनकी जांच करेगा और नियमों के अनुरूप होने पर आगे की मंजूरी से संबंधित निर्णय लेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित वैधानिक प्राधिकरण के समक्ष अपील भी लंबित होने की जानकारी अदालत को दी है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया नियामक के निर्णय और कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
फिलहाल महाराष्ट्र में खोपोली इकाई में निर्मित प्रभावित उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध जारी है। यह कार्रवाई पूरे देश में ओल्ड मोंक की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है। दूसरे राज्यों में उत्पादों की उपलब्धता को इस महाराष्ट्र संबंधी आदेश से अलग समझना जरूरी है।
क्या दूसरे शराब ब्रांड भी FSSAI की कार्रवाई के दायरे में हैं?
यह विवाद केवल ओल्ड मोंक तक सीमित नहीं है। FSSAI ने ऐसे अन्य मादक पेय निर्माताओं के उत्पादों और लेबलिंग पर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें मूल स्पिरिट के साथ बाहरी फ्लेवर मिलाकर उन्हें सामान्य रम या व्हिस्की के नाम से बेचा जा रहा है।
यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड, जो मैकडॉवेल्स नंबर 1 जैसे ब्रांड बनाती है, ने भी नियामक की कार्रवाई के खिलाफ अदालत का रुख किया था और बाद में अपनी याचिका वापस ले ली थी।
इस मामले का असर भारत के मादक पेय उद्योग की लेबलिंग व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नियामक का मुख्य उद्देश्य उत्पाद की वास्तविक प्रकृति, उसमें इस्तेमाल सामग्री और निर्माण संबंधी दावों को लेकर उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। अब सबकी नजर FSSAI की मंजूरी और कंपनी के नए लेबल पर रहेगी।
