मृदंगम वादक श्रीधर पार्थसारथी का पुणे में लाइव प्रस्तुति के दौरान निधन, 54 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर मृदंगम वादक विद्वान श्रीधर पार्थसारथी (Sridhar Parthasarathy) का 54 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के पुणे में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान वह अचानक मंच पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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यह घटना लोकमत स्वरचैतन्य दिवाली पहाट 2026 कार्यक्रम के दौरान हुई। उनके निधन की खबर से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और भारतीय वाद्य संगीत जगत में शोक की लहर है। गायक शंकर महादेवन, संगीतकार लुई बैंक्स और कई अन्य कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

Sridhar Parthasarathy Death: पुणे में प्रस्तुति के दौरान क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीधर पार्थसारथी शुक्रवार सुबह पुणे के बालेवाड़ी इलाके में आयोजित दिवाली पहाट संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति दे रहे थे। उन्होंने सुबह करीब 7 बजे मंच पर मृदंगम वादन शुरू किया था।

दर्शकों की बार-बार फरमाइश पर उन्होंने निर्धारित समय से अधिक देर तक प्रस्तुति जारी रखी। इसी दौरान संगीत की एक रचना बजाते समय वह अचानक मंच पर गिर पड़े। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों ने तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से मणिपाल अस्पताल, बानेर ले जाया गया।

अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार, आपातकालीन विभाग में पहुंचने के बाद भी डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।

Hariharan A | I am heartbroken beyond words. It is impossible to process that our dear friend and exceptional rhythm wizard, Sridhar Parthasarathy, is no... | Instagram

कौन थे मृदंगम वादक श्रीधर पार्थसारथी?

श्रीधर पार्थसारथी भारतीय कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित मृदंगम वादकों में शामिल थे। उन्होंने लगभग छह वर्ष की उम्र से मृदंगम सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने विद्वान कराईकुडी आर. चंद्रमौली के मार्गदर्शन में इस कला का प्रशिक्षण लिया।

अपने चार दशक से अधिक लंबे संगीत सफर में उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा किया। इनमें डी. के. पट्टम्माल, मदुरै जी. एस. मणि, डॉ. एम. बालमुरलीकृष्ण और रंगनाथ शर्मा जैसे कलाकार शामिल हैं।

उन्होंने शंकर महादेवन, संजीव अभ्यंकर, रतन मोहन शर्मा और नंदकिशोर मुले के साथ जुगलबंदी भी की। इसके अलावा वह लुई बैंक्स, टी. एच. विक्कू विनायकरम, रंजीत बरोट और तौफीक कुरैशी जैसे संगीतकारों के समूहों का हिस्सा रहे।

अंतरराष्ट्रीय संगीत जगत में भी बनाई पहचान

श्रीधर पार्थसारथी की विशेषता यह थी कि वह पारंपरिक कर्नाटक संगीत के साथ-साथ अलग-अलग संगीत शैलियों में भी समान सहजता से प्रस्तुति देते थे।

वह वर्ष 2008 में जारी अंतरराष्ट्रीय संगीत एल्बम ‘Miles from India: A Celebration of the Music of Miles Davis’ का भी हिस्सा थे। इस एल्बम में गीनो बैंक्स, राकेश चौरसिया और सेल्वा गणेश जैसे प्रसिद्ध कलाकारों ने भी योगदान दिया था।

उन्होंने भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों तथा कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी। मृदंगम पर उनकी मजबूत पकड़, लयकारी और अलग-अलग संगीत परंपराओं के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता उनकी पहचान थी।

शंकर महादेवन और लुई बैंक्स ने जताया दुख

श्रीधर के निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत जगत की कई हस्तियों ने उन्हें याद किया।

मृदंग वादक श्रीधर पार्थसारथी का मंच पर प्रस्तुति देते हुए निधन हो गया - द हिंदू

गायक एवं संगीतकार शंकर महादेवन ने बताया कि श्रीधर के साथ उनका करीब 40 साल पुराना संबंध था। उन्होंने भावुक संदेश में याद किया कि लगभग चार दशक पहले उनके पहले कर्नाटक शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में श्रीधर ने ही मृदंगम बजाया था। उन्होंने उन्हें बेहतरीन कलाकारों में से एक बताते हुए उनके निधन को व्यक्तिगत और संगीत जगत की बड़ी क्षति बताया।

संगीतकार लुई बैंक्स ने भी अपने करीबी मित्र और सहयोगी को खोने पर गहरा दुख व्यक्त किया। वहीं, ड्रमर गीनो बैंक्स ने उन्हें अपना मार्गदर्शक और बेहद मददगार इंसान बताया।

सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ी दुर्गा जसराज और तालवादक गणेश मुरली अय्यर ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्रीधर पार्थसारथी का मंच पर संगीत बजाते हुए अचानक दुनिया से चले जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका संगीत, उनकी लयकारी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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द्वारा Kanchan