India Airfare Surge: हवाई किराये में 700% तक बढ़ोतरी के दावे पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, तत्काल सुनवाई से इनकार
त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के बीच कुछ उड़ानों के किराये में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ोतरी का दावा किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि एयरलाइंस मांग के आधार पर मनमाने तरीके से किराये बढ़ा रही हैं और कुछ मार्गों पर टिकट की कीमतें सामान्य किराये से सात गुना तक पहुंच गई हैं।
हालांकि, 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “हवाई यात्रा मत कीजिए।” अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित है।
India Airfare Surge: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ के सामने हवाई किराये में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया गया। पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह शामिल थे।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि त्योहारी सीजन में हवाई किराये में लगभग 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि हवाई परिवहन एक आवश्यक सेवा है और इतनी अधिक कीमतों से आम यात्रियों को परेशानी हो रही है। इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा, “हवाई यात्रा मत कीजिए।” इसके बाद पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की ओर से दायर पहले से लंबित जनहित याचिका से जुड़ा है। तत्काल सुनवाई की मांग खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य याचिका भी खारिज कर दी गई है।
किन मार्गों पर हवाई किराये में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी का दावा?
याचिकाकर्ता की ओर से 30 अक्टूबर को दाखिल आवेदन में कई घरेलू मार्गों के किराये का उदाहरण दिया गया है। आवेदन के अनुसार:
- दिल्ली-कोलकाता: सामान्य दिनों में 10,000 से 11,000 रुपये का टिकट 6 नवंबर की यात्रा के लिए 78,694 रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया।
- बेंगलुरु-दिल्ली: 6 नवंबर को सुबह 5 बजे की उड़ान का किराया लगभग 15,901 रुपये, जबकि दोपहर 3:45 बजे की उड़ान का किराया 40,506 रुपये बताया गया।
- मुंबई-दिल्ली: सामान्य किराये में बढ़ोतरी के बाद टिकट की कीमत 60,577 रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया।
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ये आंकड़े याचिका में दिए गए उदाहरण हैं, न कि पूरे विमानन बाजार के औसत किराये। याचिकाकर्ता का कहना है कि एक ही मार्ग पर अलग-अलग समय की उड़ानों के किराये में इतना बड़ा अंतर केवल ईंधन की कीमतों से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
याचिका में यात्रियों के लिए क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार और विमानन नियामक से घरेलू उड़ानों के किराये में पारदर्शिता लाने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है। इसमें एल्गोरिदम आधारित गतिशील मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण और अचानक होने वाली किराया वृद्धि को सीमित करना शामिल है।
इसके अलावा वर्तमान त्योहारों और साल के अंत में यात्रा के दौरान इकोनॉमी श्रेणी के हवाई किराये पर अस्थायी सीमा लगाने की मांग भी की गई है।
याचिका में इकोनॉमी श्रेणी के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 15 किलोग्राम से बढ़ाकर 25 किलोग्राम करने का अनुरोध भी शामिल है।
एयरलाइंस ने किराया बढ़ने की क्या वजह बताई?
एयरलाइंस की ओर से अधिक किराये के पीछे विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की कीमतों और परिचालन लागत को प्रमुख कारण बताया जाता रहा है। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि एक ही दिन और एक ही मार्ग पर उड़ान भरने वाले विमानों के ईंधन खर्च में बहुत अधिक अंतर नहीं होता। ऐसे में केवल ईंधन की कीमतों को कई गुना किराया बढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
इस विवाद में यात्रियों के हितों और एयरलाइंस के व्यावसायिक मूल्य निर्धारण के बीच संतुलन का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए हवाई किराया नियम
हवाई किराये पर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय विमानन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
नए नियमों के नियम 192 के तहत असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए एयरलाइंस को किराये से संबंधित निर्देश दे सकेगी। इसके अलावा एयरलाइंस को परिचालन लागत जैसे कारकों को ध्यान में रखकर किराया निर्धारित करना होगा और निर्धारित जानकारी डीजीसीए को देनी होगी।
यात्रियों को टिकट बुक करते समय मूल किराया, कर, अतिरिक्त शुल्क, रद्दीकरण शुल्क और धनवापसी की शर्तों की अलग-अलग जानकारी देना भी जरूरी होगा।
हालांकि, इन नियमों में सामान्य परिस्थितियों के लिए कोई निश्चित अधिकतम हवाई किराया तय नहीं किया गया है। यानी सरकार को असाधारण स्थिति में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिलेगा, लेकिन हर टिकट की कीमत पर नियमित सीमा लागू नहीं होगी।
16 नवंबर को फिर होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
हवाई किराये में अनियमित बढ़ोतरी से जुड़ी मुख्य जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 16 नवंबर 2026 को सुनवाई होनी है। अदालत ने केंद्र सरकार से नए विमानन नियमों को अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है।
अब देखना होगा कि नए नियमों के जरिए हवाई टिकटों की कीमतों में पारदर्शिता और यात्रियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल तत्काल किराया सीमा लागू करने का कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है।
