डॉ. रचना श्रॉफ का निधन: पित्त नली के कैंसर की विशेषज्ञ भारतीय-अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट 47 साल की उम्र में नहीं रहीं

पित्त नली के कैंसर (कोलेंजियोकार्सिनोमा) के क्षेत्र में दुनियाभर में पहचानी जाने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रचना श्रॉफ का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने 11 अक्टूबर 2026 को अंतिम सांस ली। वे यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कैंसर सेंटर में वरिष्ठ चिकित्सक-वैज्ञानिक थीं। विश्वविद्यालय ने उनके निधन की जानकारी साझा की।

कौन थीं डॉ. रचना श्रॉफ?

रचना श्रॉफ का जन्म 8 मई 1979 को न्यूयॉर्क में हुआ था। उनके पिता जैव-रसायनशास्त्री और मां किडनी रोग विशेषज्ञ थीं, दोनों भारतीय मूल के थे। उनकी परवरिश अमेरिका के एरिजोना राज्य के टक्सन शहर में हुई। स्कूल के दिनों में ही उन्हें एक फेलोशिप मिली, जिसके तहत उन्होंने कैंसर विशेषज्ञ की प्रयोगशाला में काम किया और यहीं से कैंसर अनुसंधान में उनकी रुचि जागी।

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उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी से चिकित्सा की डिग्री ली। इसके बाद ह्यूस्टन के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर से मेडिकल ऑन्कोलॉजी की फेलोशिप पूरी की। वे वहीं 2010 से 2018 तक फैकल्टी में रहीं। साल 2018 में वे अपने गृहनगर टक्सन लौटीं और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना से जुड़ गईं।

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में बड़ी जिम्मेदारियां

यूनिवर्सिटी में वे हेमेटोलॉजी/ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख और कैंसर सेंटर में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशंस की एसोसिएट डायरेक्टर रहीं। वे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी की प्रोफेसर के पद पर भी रहीं। उनका शोध मुख्य रूप से अग्न्याशय (पैंक्रियाज), लिवर और पित्त नली के कैंसर पर केंद्रित था।

Indian-American Cancer Researcher Rachna Shroff Dies At 47 After Battling Terminal Cancer | News Mobile

पित्त नली के कैंसर के इलाज में योगदान

कोलेंजियोकार्सिनोमा एक दुर्लभ कैंसर है, जिसके इलाज के विकल्प पहले बहुत सीमित थे। डॉ. श्रॉफ ने इस दिशा में कई अहम क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व किया। वे SWOG S1815 ट्रायल की राष्ट्रीय प्रमुख जांचकर्ता थीं, जिसमें पित्त नली के कैंसर के लिए तीन कीमोथेरेपी दवाओं के संयोजन को संभावित नया मानक इलाज बनाने पर काम हुआ। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके नेतृत्व वाले ऐतिहासिक ट्रायल की वजह से आज इस क्षेत्र की तस्वीर काफी बदल चुकी है।

शोध, पुरस्कार और सम्मान

उन्होंने 80 से ज्यादा शोध प्रकाशन लिखे और 130 से ज्यादा पेशेवर मंचों पर व्याख्यान दिए। वे अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) की फेलो थीं और 2024 के GI ASCO सम्मेलन की अध्यक्ष रहीं। इसके अलावा वे SWOG की हेपेटोबिलियरी उप-समिति की सह-अध्यक्ष भी थीं।

Who was Dr. Rachna Shroff? Indian-origin University of Arizona oncologist who died of the disease she was trying to cure at 47 - The Times of India

बीमारी के बीच भी जारी रखा शोध का संघर्ष

विश्वविद्यालय के अनुसार डॉ. श्रॉफ स्वयं भी कैंसर से जूझ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने इस बीमारी पर शोध को आगे बढ़ाने की मुहिम नहीं छोड़ी। सितंबर में उन्होंने ‘कॉन्कर कैंसर–रचना श्रॉफ FASCO एंडोव्ड यंग इन्वेस्टिगेटर अवॉर्ड इन बिलियरी कैंसर्स’ की शुरुआत की। यह पुरस्कार पित्त नली के कैंसर पर शोध करने वाले युवा वैज्ञानिकों के लिए है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ ही हफ्तों में इसके लिए 13.5 लाख डॉलर से ज्यादा की राशि जुटाई गई।

सहकर्मियों ने कैसे याद किया?

यूनिवर्सिटी की श्रद्धांजलि में कहा गया कि वे कैंसर शोध के साथ-साथ चिकित्सा के मानवीय पक्ष को भी हमेशा अहमियत देती थीं। उनके साथियों और मरीजों के लिए वे एक समर्पित चिकित्सक और मार्गदर्शक रहीं। उनका निधन कैंसर अनुसंधान और खासकर दुर्लभ कैंसरों के इलाज के क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। अंतिम संस्कार या स्मृति सभा की जानकारी आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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द्वारा Kanchan

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