प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छूटने के बाद बोले अजय राय, 2027 में पिंडरा सीट जीतना है लक्ष्य; कांग्रेस दफ्तर में जूतम-पैजार पर भी तोड़ी चुप्पी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय ने पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अपनी अगली राजनीतिक रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के समर्पित सिपाही हैं और उनका अगला लक्ष्य वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट जीतकर पार्टी को मजबूत करना है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) कार्यालय में नए प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण समारोह से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई थी।
13 अक्टूबर 2026 को सामने आए साक्षात्कार में अजय राय ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने के बाद से वह पार्टी के साथ बने हुए हैं और संगठन जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे निभाएंगे।
Ajay Rai का अगला लक्ष्य क्या है?
अजय राय ने स्पष्ट किया कि अब उनका ध्यान वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट पर है। उन्होंने कहा कि वह क्षेत्र के लोगों और परिवारों को लंबे समय से जानते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए काम करेंगे।
अजय राय पांच बार विधायक रह चुके हैं। वह कोलअसला और पिंडरा विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।
प्रदेश अध्यक्ष के पद पर लगभग तीन वर्ष काम करने के बाद अब वह संगठन के बजाय चुनावी मैदान और अपने क्षेत्र पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटाए जाने के बावजूद वह कांग्रेस में सक्रिय रहेंगे।
कांग्रेस कार्यालय में क्या हुआ था?
11 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आराधना मिश्रा ‘मोना’ के औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का पदभार संभालने से पहले माहौल तनावपूर्ण हो गया। अजय राय के समर्थकों और कांग्रेस की महिला इकाई से जुड़ी नेता ममता चौधरी के समर्थकों के बीच रास्ता खाली कराने को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान जूते फेंके गए और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की तथा अभद्र भाषा के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं। ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि अजय राय के समर्थकों ने उनके साथ आई महिला कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार और मारपीट की। दूसरी ओर, अजय राय ने कहा कि उन्होंने अनुशासनहीनता करने वालों के बारे में नए प्रदेश अध्यक्ष को जानकारी और सबूत दिए हैं।
इस विवाद के कारण आराधना मिश्रा की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी देरी हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप करके स्थिति शांत कराई, जिसके बाद पदभार ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई।
ममता चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया गया?
घटना के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया। 13 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, ममता चौधरी को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया। यह कदम प्रदेश कार्यालय में हुए विवाद और महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद उठाया गया।
हालांकि, ममता चौधरी को दिल्ली बुलाए जाने को उनके खिलाफ अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं माना जाना चाहिए। मामले में पार्टी नेतृत्व की जांच और आगे के निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखने की चुनौती है।
अजय राय का पिंडरा सीट पर ध्यान केंद्रित करने का ऐलान उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा बताता है। वहीं, कांग्रेस मुख्यालय में हुआ विवाद पार्टी की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आने वाले महीनों में पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखकर चुनावी तैयारी कितनी प्रभावी बनाती है, यह उसकी राजनीतिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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