शेखर सुमन: बेटे आयुष को खोने के बाद टूट गए थे अभिनेता, इलाज के लिए किया TV पर काम; फिर साइन की ₹35 करोड़ की डील
मुंबई: अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपनी जिंदगी के सबसे दर्दनाक दौर को याद करते हुए बेटे आयुष को खोने का दुख साझा किया है। 11 साल की उम्र में गंभीर बीमारी के कारण आयुष का निधन हो गया था। उस समय शेखर सुमन के पास नियमित काम भी नहीं था और बेटे के इलाज की चिंता ने परिवार को मुश्किल हालात में डाल दिया था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अभिनेता ने बताया कि किस तरह इस त्रासदी के बीच उन्हें टेलीविजन पर काम करने का फैसला लेना पड़ा। बाद में यही माध्यम उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक का कारण बना।
शेखर सुमन ने यह भी बताया कि वर्ष 1997 में उनके चर्चित कार्यक्रम Movers & Shakers के लिए उन्हें 35 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला था। यह उपलब्धि ऐसे समय आई, जब उनका शुरुआती फिल्मी करियर और निजी जिंदगी दोनों कठिन दौर से गुजर चुके थे।
बेटे आयुष की बीमारी के समय काम के लिए परेशान थे शेखर सुमन
शेखर सुमन ने द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा आयुष गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है, तब उनके पास कोई नियमित काम नहीं था। उन्होंने कहा कि यह खबर उनके लिए बेहद बड़ा सदमा थी। बेटे के इलाज का खर्च उठाने की चिंता और आर्थिक अनिश्चितता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।
इसी दौरान निर्देशक आनंद महेंद्रू ने उन्हें टीवी धारावाहिक देख भाई देख में काम करने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में शेखर टेलीविजन पर काम करने को लेकर उत्साहित नहीं थे, क्योंकि वह फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहते थे। लेकिन बेटे के इलाज और परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
अभिनेता ने बताया कि शूटिंग के दौरान सेट पर एक टेलीफोन रखा जाता था, ताकि परिवार से आयुष की तबीयत की जानकारी मिल सके। फोन बजने पर उन्हें अनहोनी का डर सताने लगता था। परिवार की चिंता के बावजूद उन्हें कैमरे के सामने अपनी भूमिका निभानी पड़ती थी।
आयुष के आखिरी शब्द आज भी याद करते हैं अभिनेता
शेखर सुमन ने बेटे के आखिरी पलों को याद करते हुए बताया कि आयुष ने निधन से कुछ समय पहले संस्कृत के श्लोक पढ़ने शुरू कर दिए थे। अभिनेता के मुताबिक, उस समय आयुष ने अपने पिता का हाथ पकड़कर कहा था कि वह कहीं नहीं जाना चाहता और उनसे उसे बचाने की गुहार लगाई थी।
उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य उस समय बेहद असहाय महसूस कर रहे थे। बेटे को पीड़ा में देखना उनके और उनकी पत्नी अलका सुमन के लिए असहनीय था। अभिनेता ने कहा कि बेटे को खोने का दर्द आज भी उनके परिवार के जीवन का हिस्सा है और वे रोजाना कुछ समय उसकी यादों को साझा करने में बिताते हैं।
आयुष की बीमारी और निधन ने शेखर सुमन के जीवन के प्रति नजरिये को बदल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि सफलता, पैसा और प्रसिद्धि महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन परिवार और अपनों का साथ कहीं अधिक मायने रखता है।
₹25 हजार की पहली फिल्म से ₹35 करोड़ की टीवी डील तक का सफर
शेखर सुमन ने वर्ष 1984 में फिल्म उत्सव से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उनके साथ रेखा नजर आई थीं और इसका निर्देशन गिरीश कर्नाड ने किया था। अभिनेता के मुताबिक, इस फिल्म के लिए उन्हें 25 हजार रुपये मिले थे।
इसके बाद टेलीविजन पर देख भाई देख ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई। वर्ष 1997 में Movers & Shakers के लिए 35 करोड़ रुपये का अनुबंध मिलने के बाद वह देश के सबसे अधिक भुगतान पाने वाले टीवी कलाकारों में शामिल हो गए।
यह शो अपने व्यंग्य, हास्य और मशहूर हस्तियों के साथ बातचीत के लिए लोकप्रिय हुआ। शेखर सुमन को टेलीविजन का बड़ा सितारा माना जाने लगा और उनके करियर ने नई ऊंचाई हासिल की।
शेखर सुमन के लिए क्यों खास है यह कहानी?
शेखर सुमन का सफर केवल आर्थिक सफलता या मनोरंजन जगत में लोकप्रियता की कहानी नहीं है। यह उस दौर की भी याद दिलाता है, जब उन्हें निजी त्रासदी और करियर की अनिश्चितता के बीच अपने परिवार के लिए निर्णय लेने पड़े।
बेटे को खोने का दुख उनके जीवन का ऐसा हिस्सा है, जिसे वह आज भी याद करते हैं। वहीं, टेलीविजन पर मिली सफलता ने उन्हें एक नई पहचान दी। अभिनेता की कहानी बताती है कि जीवन में बड़ी उपलब्धियों के पीछे कई बार ऐसे संघर्ष छिपे होते हैं, जिन्हें दुनिया केवल सफलता मिलने के बाद देख पाती है।

[…] 2026: इतिहास, महत्वपूर्ण दिवस और जन्मदिन शेखर सुमन: बेटे को खोने का दर्द, ₹35 करोड… Apple HomeView Price in India ₹39,900, Features और Launch Date एल. मुरुगन […]