धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी भाजपा: राज्यसभा सूची के बाद “टाटा बाय-बाय” पोस्ट, अब समर्थकों की बैठक में होगा अगला फैसला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बरेली की आंवला लोकसभा सीट से दो बार के भाजपा सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप (Dharmendra Kashyap) ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की उम्मीदवार सूची आने के बाद उन्होंने फेसबुक पर “टाटा बाय-बाय” लिखा था। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को उन्होंने मीडिया के सामने पार्टी छोड़ने की बात कही। फिलहाल उन्होंने किसी दूसरे दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
“टाटा बाय-बाय” पोस्ट से शुरू हुई हलचल
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। धर्मेंद्र कश्यप का नाम इस सूची में नहीं था। इसके बाद उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर “टाटा बाय-बाय” लिखकर पोस्ट डाल दी। पोस्ट में किसी पार्टी या नेता का नाम नहीं था, लेकिन इसे राज्यसभा टिकट से जोड़कर देखा गया।
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपनी प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी हटा दी थी। साथ ही समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें भी चल रही हैं, हालांकि कश्यप ने इस पर कुछ नहीं कहा है।
पार्टी छोड़ने की वजह क्या बताई?
मीडिया से बातचीत में कश्यप ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उनके अनुसार जिन लोगों ने उस चुनाव में खुलकर उनका विरोध किया, उन्हें अब पार्टी में बड़े पद मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं करेगी, तो उनके जैसे कार्यकर्ताओं का पार्टी को अलविदा कहना स्वाभाविक है। उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।

एक अहम बात यह है कि उन्होंने राज्यसभा का टिकट न मिलने को सीधे तौर पर अपने इस्तीफे का कारण नहीं बताया। अन्य रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पार्टी में सम्मान न मिलने की बात भी कही थी और भाजपा के भीतर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए थे। यह भी कहा कि कश्यप समाज के किसी बड़े नेता को आगे बढ़ाने पर पार्टी के कुछ लोगों को आपत्ति रहती है। ये दावे कश्यप के हैं, पार्टी की ओर से इस पर हमें कोई जवाब नहीं मिला।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र कश्यप बरेली की आंवला लोकसभा सीट से राजनीति करते रहे हैं।
- 2014: समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।
- 2014 और 2019: भाजपा के टिकट पर आंवला से लोकसभा चुनाव जीते।
- 2024: लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
- 2026: राज्यसभा चुनाव के लिए जारी भाजपा की सूची में नाम नहीं आया, फिर पार्टी छोड़ने का एलान।
रिपोर्टों के अनुसार राज्यसभा टिकट को लेकर चर्चा कई सालों से चल रही थी।
अब आगे क्या?
कश्यप का कहना है कि वह जल्द ही समर्थकों के साथ बड़ी बैठक करेंगे। इसमें सभी की राय सुनने के बाद अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समर्थक जैसा चाहेंगे, वैसा करेंगे। अब सबकी नजर इस प्रस्तावित बैठक पर टिकी है।
भाजपा के लिए क्या मायने?
भाजपा ने अपने सभी आठ राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में दाखिल करा दिए हैं। फिर भी पार्टी के भीतर टिकट से वंचित नेताओं की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कश्यप का जाना रुहेलखंड और आसपास के क्षेत्रों में कश्यप समाज के वोटों पर असर डाल सकता है। इस असर को लेकर विश्लेषकों की राय अलग-अलग है और उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इसे बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र कश्यप का भाजपा छोड़ना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ है। उनका अगला कदम तय करेगा कि यह सिर्फ एक नेता की नाराजगी साबित होता है या इसका असर पार्टी की सामाजिक रणनीति पर भी पड़ता है। फिलहाल समर्थकों की बैठक और अगली घोषणा का इंतजार है।

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