कोलकाता SRFTI कैंपस हिंसा मामले में बड़ा अपडेट: एसआईटी (SIT) ने राज्य सरकार को सौंपी 6 पन्नों की पहली जांच रिपोर्ट; 250 लोग चिन्हित, 23 से पूछताछ

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कुणाल अग्रवाल के नेतृत्व वाली 6 सदस्यीय एसआईटी ने नबान्न में सीलबंद लिफाफे में सौंपी स्थिति रिपोर्ट; सीसीटीवी फुटेज खंगालने और क्राइम सीन री-क्रिएट करने के बाद दर्ज किए गए बयान।


देश के प्रतिष्ठित सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान (SRFTI), कोलकाता के परिसर में बीते दिनों हुई हिंसक झड़प की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। 1 अक्टूबर 2026 को कोलकाता पुलिस की 6 सदस्यीय एसआईटी ने पश्चिम बंगाल राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ (Nabanna) में गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग को 6 पन्नों की अंतरिम स्थिति रिपोर्ट (Status Report) सीलबंद लिफाफे में पेश की। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल की अगुवाई में एसआईटी ने परिसर का दौरा कर क्राइम सीन री-क्रिएट किया और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से गहन पूछताछ की।

SRFTI बवाल मामले में SIT का गठन, 5 अफसर करेंगे जांच, 3 FIR के बाद अब खुलेगा पूरा राज - srfti Kolkata clash sit probe students abgp fir west bengal ntc - AajTak

यह विवाद 27 सितंबर 2026 को तब भड़का जब आरएसएस (RSS) से जुड़े संगठन ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ (ABGP) को एसआरएफटीआई के मुख्य सभागार में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई। संस्थान के छात्रों और वामपंथी छात्र संगठनों (जैसे SFI) ने परिसर के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध किया, जिसके बाद दोनों गुटों में तीखी बहस और मारपीट शुरू हो गई। इस हिंसा में 30 से अधिक छात्र और 2 प्रोफेसर घायल हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह सचिव संघमित्रा घोष के आदेश पर 6 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था, जिसने जांच में अब तक 23 लोगों से पूछताछ की है और 250 से अधिक उपद्रवियों की पहचान की है।

1. 6 पन्नों की रिपोर्ट में क्या है खास? एसआईटी जांच के मुख्य बिंदु

नबान्न में सौंपी गई सीलबंद जांच रिपोर्ट में पुलिस ने अब तक की प्रगति का पूरा ब्यौरा दिया है:

  • 250 संदिग्धों की पहचान: सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का विश्लेषण करने के बाद लगभग 250 लोगों की पहचान की गई है जो हिंसा में शामिल थे।
  • 23 लोगों से गहन पूछताछ: एसआईटी ने पंचसायर पुलिस थाने में एसआरएफटीआई (SRFTI) प्रशासन के 10 प्रतिनिधियों, 10 छात्रों और ग्राहक पंचायत (ABGP) के 3 सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की।
  • तीन एफआईआर की जांच: पुलिस ने तीन अलग-अलग प्राथमिकियों (FIRs)—एक छात्रों की तरफ से, एक एबीजीपी की तरफ से और एक पुलिस द्वारा दर्ज स्वप्रेरित (Suo Motu) प्राथमिकी—पर संयुक्त जांच शुरू की है।

SRFTI हिंसा की जांच के लिए SIT गठित

2. एसआरएफटीआई परिसर में क्राइम सीन री-क्रिएशन और साक्ष्य जुटाना

बुधवार को एसआईटी की टीम ने एसआरएफटीआई परिसर का कई घंटों तक दौरा किया और साक्ष्य एकत्र किए:

जांच का चरण (Investigation Stage) एसआईटी द्वारा की गई कार्रवाई (SIT Action Plan)
स्थल निरीक्षण (Spot Inspection) मुख्य प्रवेश द्वार, सेमीनार हॉल और लाइब्रेरी का सूक्ष्म निरीक्षण
क्राइम सीन री-क्रिएशन घटना के समय की परिस्थितियों का सिलसिलेवार नाट्य रूपांतरण (Reconstruction)
सीसीटीवी जांच (CCTV Audit) ऑडिटोरियम और परिसर में लगे डिजिटल कैमरों की फुटेज खंगाली गई
शैक्षणिक वातावरण की बहाली छात्रों और शिक्षकों को शांत कर परिसर में सामान्य कक्षाएं शुरू कराने पर बल

3. दोनों पक्षों के आरोप: छात्र बनाम ग्राहक पंचायत (ABGP)

एसआरएफटीआई परिसर में हुई इस झड़प को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं:

SRFTI हिंसा की जांच के लिए SIT गठित

  1. छात्रों के आरोप: छात्रों का कहना है कि संस्थान के प्रेक्षागृह का इस्तेमाल राजनीतिक और दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रचार के लिए किया गया। जब उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध जताया, तो बाहर से आए लोगों ने उन्हें ‘देशद्रोही’ और ‘आतंकवादी’ कहकर लोहे की छड़ों और चाकुओं से हमला किया।
  2. ग्राहक पंचायत (ABGP) का दावा: संगठन का कहना है कि उन्होंने विधिवत शुल्क देकर और संस्थान प्रशासन की अनुमति से हॉल बुक किया था। उनके अनुसार, नशे में धुत छात्रों ने भारत माता, स्वामी विवेकानंद और मां दुर्गा के चित्रों को खंडित किया और महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।
  3. पुलिस व प्रशासन का रुख: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी अब नबान्न से आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रही है।

निष्कर्ष 

सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान में हुई हिंसा देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में वैचारिक टकराव और सुरक्षा चूक को उजागर करती है। एसआईटी द्वारा नबान्न में सौंपी गई 6 पन्नों की पहली रिपोर्ट के बाद यह उम्मीद जगी है कि जांच दल जल्द ही हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचेगा। शैक्षणिक माहौल को बहाल करने और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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द्वारा Kanchan

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