दवाओं पर ‘मुनाफाखोरी की लूट’ पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: कैंसर की ₹2,700 वाली दवा ₹27,000 में बेचने पर भड़की अदालत; कहा— “यह सीधा कत्लेआम है, 16% मार्जिन तय करे सरकार”

कॉर्पोरेट अस्पतालों और फार्मा कंपनियों के 10 गुना मुनाफे पर शीर्ष अदालत का कड़ा प्रहार; 82% गैर-अनुसूचित दवाओं के अनियंत्रित दामों पर केंद्र से मांगी रिपोर्ट।

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवा की 10 गुना कीमत पर जताई नाराजगी

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाचार मरीजों और उनके परिजनों से दवाओं के नाम पर की जा रही अत्यधिक मुनाफाखोरी पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) ने बेहद कड़ा और तल्ख रुख अपनाया है। 29 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दवाओं पर 10 गुना तक एमआरपी (MRP) मार्जिन वसूलने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह सीधा कत्लेआम (Carnage) है। रिटेलर को ₹2,700 में मिलने वाली कैंसर की दवा का एमआरपी ₹27,000 तय किया जा रहा है। कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते।”

सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता किशन चंद जैन और डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाओं में औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO 2013) के तहत गैर-अनुसूचित दवाओं की शुरुआती कीमतों पर कड़े नियंत्रण और डॉक्टरों द्वारा केवल जेनेरिक दवाएं लिखने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) केवल लगभग 1,000 ‘अनुसूचित’ (Scheduled) दवाओं की अधिकतम कीमत (Ceiling Price) तय करती है, जबकि बाजार में मौजूद 82 प्रतिशत दवाएं गैर-अनुसूचित हैं, जिनकी शुरुआती लॉन्च कीमत पर कंपनियों का पूरा एकाधिकार रहता है।

1. ₹2,700 की दवा ₹27,000 में: सुप्रीम कोर्ट ने खोली मुनाफाखोरी की पोल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा सेक्टर और निजी अस्पतालों के गठजोड़ पर कई तीखे सवाल उठाए:

  • करदाताओं और आम जनता पर भारी बोझ: पीठ ने कहा कि जब मरीज किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना (जैसे आयुष्मान भारत) के तहत इलाज कराता है, तो इस 10 गुना बढ़े हुए दाम का भुगतान अंततः देश के करदाता (Taxpayers) करते हैं।
  • अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी की अनिवार्यता: अदालत ने इस शिकायत को बेहद गंभीर माना कि कॉर्पोरेट अस्पताल मरीजों को उनके ही मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करते हैं और बाहर की सस्ती दवा स्वीकार नहीं करते।
  • इंजैक्शन पर 500% से 1500% तक मार्जिन: याचिकाओं में साक्ष्य दिए गए कि कई एंटीबायोटिक और कैंसर इंजेक्शन की रिटेलर कीमत (PTR) ₹3,520 होती है, जबकि मरीजों से एमआरपी के रूप में ₹22,437 तक वसूले जाते हैं।

Supreme Court inflated cancer drug prices hearing। Supreme Court cancer medicine pricing controversy। 2700 की दवा का 27000 दाम… गोरखधंधे पर SC आगबबूला - News18 हिंदी

2. 82% अनियंत्रित दवाएं: DPCO 2013 में बदलाव की क्यों है जरूरत?

भारत के दवा बाजार में मूल्य निर्धारण की वर्तमान स्थिति और सुप्रीम कोर्ट का प्रस्तावित समाधान:

पहलू (Aspect) वर्तमान स्थिति (Current DPCO Framework) सुप्रीम कोर्ट का प्रस्तावित समाधान (SC Proposal)
अनुसूचित दवाएं (Scheduled Drugs) बाजार का केवल ~18% हिस्सा (लगभग 1,000 फॉर्मूलेशन), कीमत तय वर्तमान व्यवस्था जारी रहे
गैर-अनुसूचित दवाएं (Non-Scheduled) बाजार का 82% हिस्सा, शुरुआती लॉन्च प्राइस पर कोई नियंत्रण नहीं कीमत पर शुरुआती सीलिंग अनिवार्य हो
रिटेलर व अस्पताल मार्जिन 100% से 1000% तक मनमाना मार्जिन PTR के ऊपर अधिकतम 16% मार्जिन कैप (16% Uniform Margin)
जेनेरिक दवाएं (Generic Medicines) ब्रांडेड और जेनेरिक के दामों में भारी अंतर डॉक्टरों द्वारा जेनेरिक सॉल्ट लिखना अनिवार्य हो

3. केंद्र सरकार का पक्ष और 16% यूनिफॉर्म मार्जिन कैप का सुझाव

Supreme Court Slams Cancer Drug Price Gap | Retailer vs MRP Controversy

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सरकार के रुख से अवगत कराया:

  1. सॉलिसिटर जनरल का आश्वासन: केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्वीकार किया कि इस अंतर को दूर करने के लिए संतुलित रास्ता निकाला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर नीतिगत समाधान खोजने की बात कही।
  2. आवश्यक और गैर-आवश्यक का अंतर खत्म करने की मांग: न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने पूछा, “आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं में यह भेदभाव क्यों? क्यों न सभी दवाओं पर एमआरपी के ऊपर 16% का यूनिफॉर्म मार्जिन कैप लागू कर दिया जाए जो कि डीपीको (DPCO) में पहले से प्रस्तावित है?”
  3. आगे की राह: सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) और रसायन व उर्वरक मंत्रालय द्वारा गैर-अनुसूचित दवाओं और कैंसर की लाइफ-सेविंग दवाओं पर मार्जिन कैप लगाने के कड़े नियम जारी किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष 

2,700 रुपये की कैंसर दवा 27,000 रुपये में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'दिनदहाड़े लूट' -

कैंसर और गंभीर बीमारियों की दवाओं पर 10 गुना तक मुनाफाखोरी को ‘कत्लेआम’ करार देकर सुप्रीम कोर्ट ने देश के करोड़ों मरीजों की आवाज बुलंद की है। दवा कंपनियों और निजी अस्पतालों द्वारा एमआरपी के आड़ में की जा रही यह वसूली न केवल मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन के अधिकार का भी हनन करती है। यदि केंद्र सरकार शीर्ष अदालत के सुझाव पर अमल करते हुए सभी दवाओं पर रिटेलर प्राइस से 16% का यूनिफॉर्म मार्जिन कैप लागू करती है, तो इससे देश में कैंसर का इलाज न केवल किफायती होगा, बल्कि आम जनता को मेडिकल लूट से स्थायी मुक्ति मिल सकेगी।

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द्वारा Kanchan

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