अशोक सिंघल की 100वीं जन्मजयंती पर उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

राम मंदिर आंदोलन के शलाका पुरुष: अशोक सिंघल की जन्मशती पर पीएम मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि; कहा- सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को समर्पित था उनका जीवन

‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड और विशेष आलेख में प्रधानमंत्री ने किया याद; 1989 में दलित कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल से पहली शिला रखवाकर अशोक सिंघल ने दी थी सामाजिक समरसता की सीख।

PM Modi pays tribute to Ashok Singhal on his birth centenary, recalls role in Ram Janmabhoomi Movement - DD India

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक दिवंगत अशोक सिंघल (Ashok Singhal – 1926 से 2015) की 100वीं जयंती (जन्मशती) के अवसर पर 27-28 सितंबर 2026 को देश भर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (138वां एपिसोड) और समाचार पत्रों में लिखे अपने विशेष आलेख ‘ए लाइफ लिव्ड फॉर भारत एंड ऑल ऑफ इट्स सिटिजन्स’ के जरिए अशोक सिंघल के जीवन, राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी केंद्रीय भूमिका तथा सामाजिक भेदभाव व असमानता के खिलाफ उनके संघर्ष को याद किया।

27 सितंबर 1926 को आगरा में जन्मे और बीएचयू (BHU) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने वाले अशोक सिंघल ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। राम जन्मभूमि आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप देने में उनकी भूमिका सबसे प्रमुख मानी जाती है। हालांकि, पीएम मोदी ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि अशोक सिंघल का योगदान केवल एक आंदोलन तक सीमित नहीं था; उन्होंने छुआछूत और सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिए काशी में डोम राजा का सम्मान किया और 1989 में बिहार के दलित समुदाय से आने वाले वीएचपी कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर की पहली शिला (शिलान्यास) रखवाकर इतिहास रचा था।

1. राम जन्मभूमि आंदोलन की दिशा और दशा बदलने वाले जननायक

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के पीछे अशोक सिंघल के दृढ़ संकल्प और संगठनात्मक क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है:

अशोक सिंघल को दी श्रद्धांजलि, राम मंदिर के निर्माण में ये था योगदान

  • 1991 का ऐतिहासिक बोट क्लब भाषण: दिल्ली के बोट क्लब में 1991 में दिए गए उनके ऐतिहासिक संबोधन और आंदोलन के चरम पर रक्तरंजित होने के बावजूद मोर्चे पर डटे रहने की तस्वीरों को आज भी याद किया जाता है।
  • संत समाज को एक मंच पर लाना: उन्होंने देश भर के साधु-संतों, पीठों और अखाड़ों को एक सूत्र में पिरोकर धर्म संसद का गठन किया, जिससे राम मंदिर आंदोलन को आध्यात्मिक शक्ति मिली।
  • अयोध्या में राम मंदिर का साकार रूप: पीएम मोदी ने कहा कि आज अयोध्या में जो भव्य राम मंदिर आकार ले चुका है, उसे देखकर यदि अशोक जी हमारे बीच होते तो वे सर्वाधिक प्रसन्न होते।

2. छुआछूत के खिलाफ बिगुल और ‘सामाजिक समरसता’ का संदेश

अशोक सिंघल का मानना था कि जब तक समाज में ऊंच-नीच का भेदभाव रहेगा, तब तक राष्ट्र सशक्त नहीं हो सकता:

  • दलित कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल द्वारा शिलान्यास: 9 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास करते समय अशोक सिंघल ने पहला पत्थर दलित समाज के कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल से रखवाया था, जो सामाजिक समरसता की मिसाल बना।
  • काशी के डोम राजा का सम्मान: वाराणसी में आयोजित धर्म संसद के दौरान उन्होंने काशी के डोम राजा का नागरिक अभिनंदन किया और उनके घर जाकर समरसता का संदेश दिया।
  • एकल विद्यालय (Ekal Vidyalaya) योजना: देश के दूरदराज और जनजातीय (आदिवासी) क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए उन्होंने ‘एकल विद्यालय’ की नींव रखी, जो आज लाखों बच्चों को शिक्षित कर रहा है।

अशोक सिंघल की याद में: ...और बाबरी गिर गई - Ashok Singhal: The man who started Ram Mandir Andolan - Navbharat Times

3. वैश्विक संगठन, आपदा राहत और बहुमुखी व्यक्तित्व

अशोक सिंघल केवल एक संगठनकर्ता ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे:

  1. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदू संस्कृति का प्रसार: उन्होंने 1993 में अमेरिका (शिकागो) और 2000 में ट्रिनिडाड एंड टोबैगो में ‘विश्व हिंदू सम्मेलन’ का सफल आयोजन करके वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का परचम लहराया।
  2. 2001 भुज भूकंप में राहत कार्य: 2001 में गुजरात के कच्छ-भुज में आए भीषण भूकंप के समय उन्होंने बिना प्रचार के दुर्गम इलाकों में बड़े पैमाने पर राहत और पुनर्वास कार्य संचालित किए।
  3. शास्त्रीय संगीत और वैदिक शिक्षा: बीएचयू से इंजीनियरिंग करने वाले अशोक जी एक कुशल गायक भी थे। बैठकों में उनका गाना सभी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर देता था। उन्होंने वैदिक शिक्षा और वेद पाठशालों के संरक्षण में भी अहम योगदान दिया।

निष्कर्ष 

मन की बात: PM मोदी ने अशोक सिंघल जी को किया नमन, रामजन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को किया याद https://prernasamvad.in/story/Mann-Ki-Baat-PM-Modi -pays-tribute-to-Ashok-Singhal ...

अशोक सिंघल का 89 वर्षों का जीवन त्याग, तपस्या और अटूट राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। जन्मशती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि अशोक सिंघल का असली स्मारक केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं, बल्कि एक ऐसा समरस, छुआछूत-मुक्त और सांस्कृतिक रूप से जागृत भारत है जिसकी कल्पना उन्होंने की थी। उनकी जन्मशती वर्ष में युवा पीढ़ी को उनके विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश से जोड़ना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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द्वारा Kanchan

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