फास्टैग (FASTag) के नियमों में बड़ा बदलाव: नकद भुगतान पर लगेगा दोगुना जुर्माना, 2026 के अंत तक शुरू होगी सैटेलाइट टोल प्रणाली

राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98% से अधिक डिजिटल टोल संग्रह; गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए ‘वार्षिक पास’ का विकल्प और बिना रुके 80 किमी/घंटे की रफ्तार से कटेगा टोल।

टोल प्लाजा के नए नियम - फास्टैग, टोल टैक्स में छूट और जुर्माने की जानकारी

भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले करोड़पति वाहन चालकों के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टोल संग्रह प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए हैं। देश भर के 1,000 से अधिक टोल प्लाजा पर अब 100 प्रतिशत डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू कर दी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 98 प्रतिशत से अधिक टोल संग्रह अब फास्टैग (FASTag) और डिजिटल माध्यमों से हो रहा है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार 2026 के अंत तक टोल प्लाजा के बैरियर पूरी तरह हटाकर जीएनएसएस (GNSS) सैटेलाइट आधारित टोल प्रणाली लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों, समय की बर्बादी और ईंधन की खपत को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने नकद (कैश) लेनदेन को लगभग हतोत्साहित कर दिया है। यदि कोई वाहन चालक बिना सक्रिय फास्टैग या कम शेष राशि (Balance) के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान करने की कोशिश करता है, तो उससे सामान्य शुल्क से दोगुना (2x) टोल जुर्माना वसूला जा रहा है। वहीं, तकनीक खराब होने की स्थिति में यूपीआई (UPI) से भुगतान करने पर 1.25 गुना शुल्क का प्रावधान किया गया है। दूसरी ओर, प्रतिदिन या अक्सर राजमार्गों पर सफर करने वाले नागरिकों के लिए ‘फास्टैग वार्षिक पास’ (FASTag Annual Pass) योजना को भी काफी सफलता मिली है।

1. ‘फास्टैग वार्षिक पास’ (Annual Pass): निजी वाहन चालकों को बड़ी राहत

अक्सर राजमार्गों पर यात्रा करने वाले नागरिकों और दैनिक यात्रियों (Commuters) के लिए सरकार ने विशेष सहूलियत दी है:

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  • एकमुश्त शुल्क और वैधता: गैर-व्यावसायिक कारों, जीपों और वैन के लिए ₹3,075 का वार्षिक पास निर्धारित किया गया है। यह पास भुगतान की तिथि से एक वर्ष के लिए अथवा 200 टोल प्लाजा पार करने तक वैध रहता है।
  • 77 लाख से अधिक पास जारी: सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, अब तक 77 लाख से अधिक वार्षिक पास जारी किए जा चुके हैं, जिनसे 63 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन दर्ज हुए हैं। कार और जीप वर्ग में होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी वार्षिक पास की है।
  • शिकायत निवारण प्रणाली: यदि किसी चालक का गलत टोल कटता है, तो उसके लिए 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन 1033, समर्पित ई-मेल और ‘राजमार्ग यात्रा’ (RajmargYatra App) के जरिए पारदर्शी समाधान की व्यवस्था की गई है।

2. नकद भुगतान पर कड़ा रुख: डिजिटल अपनाने का दबाव

टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ खत्म करने के लिए डिजिटल नियमों को बेहद सख्त बनाया गया है:

  • दोगुना टोल जुर्माना: विंडस्क्रीन पर फास्टैग न लगा होने, टैग के ब्लैकलिस्ट होने या नकद लेन-देन करने पर स्वचालित रूप से दो गुना शुल्क वसूला जाता है।
  • यूपीआई (UPI) विकल्प: यदि फास्टैग स्कैनर की तकनीकी खराबी या मामूली कम बैलेंस के कारण स्कैन नहीं हो पाता, तो चालक यूपीआई के माध्यम से 1.25 गुना दर पर तत्काल भुगतान कर सकते हैं।

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3. 2026 के अंत तक ‘सैटेलाइट टोल प्रणाली’ (GNSS): खत्म होंगे टोल प्लाजा बैरियर

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत जल्द ही भौतिक टोल प्लाजा से मुक्त होने वाला है:

  • जीएनएसएस और एआई (AI) तकनीक: नई ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) तकनीक के जरिए गाड़ियों में ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) या नंबर प्लेट ट्रैकिंग के जरिए टोल कटेगा।
  • केवल तय दूरी का भुगतान: वर्तमान में किलोमीटर चाहे जितने हों, पूरा टोल देना पड़ता है। लेकिन सैटेलाइट सिस्टम से वाहन चालक राष्ट्रीय राजमार्ग पर जितनी किलोमीटर दूरी तय करेगा, उसके बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से केवल उतने ही रास्ते का सटीक टोल अपने-आप कटेगा।
  • 80 किमी/घंटे की रफ्तार से सफर: इस प्रणाली के पूरी तरह लागू होने के बाद वाहनों को टोल बूथ पर रुकना नहीं पड़ेगा। गाड़ियां 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी, जिससे सालाना ₹1,500 करोड़ का ईंधन बचेगा और ₹6,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

निष्कर्ष 

फास्टैग ने भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल दिया है। 100% डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ता यह कदम न केवल परिवहन प्रणाली को पारदर्शी बना रहा है, बल्कि समय और ईंधन की भी भारी बचत कर रहा है। आगामी सैटेलाइट टोल प्रणाली के लागू होने से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग विश्व स्तरीय और पूरी तरह से बैरियर-मुक्त बन जाएंगे, जो डिजिटल इंडिया की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

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द्वारा Kanchan

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