NHAI का बड़ा फैसला: एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड हाईवे के लिए नई एकीकृत गाइडलाइंस जारी, सुरक्षा और स्पीड में होगा सुधार

‘विकसित भारत 2047’ के तहत 50,000 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर्स का ढांचा तैयार; ट्रैफिक दबाव के आधार पर तय होगी सड़कों की चौड़ाई और लेआउट।

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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे को छोड़कर अन्य सभी आगामी 4-लेन और 6-लेन ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए 21 सितंबर 2026 को नए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इन दिशानिर्देशों का प्राथमिक उद्देश्य डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में एकरूपता लाना और देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर तकनीकी मानकों व सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न के तहत देश में 50,000 किलोमीटर से अधिक लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर्स विकसित करने की योजना है। अब तक एक्सप्रेसवे के अलावा अन्य हाई-स्पीड राजमार्गों के लिए कोई अलग एकीकृत मानक मौजूद नहीं थे, जिससे अलग-अलग परियोजनाओं की डीपीआर में भिन्नता देखी जाती थी। एनएचएआई का यह नया मानक ढांचा सड़कों की लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने, वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।

1. ट्रैफिक दबाव के आधार पर लेन और सड़क की चौड़ाई का मानकीकरण

एनएचएआई की नई गाइडलाइंस के तहत आगामी राजमार्गों की संरचना और राइट-ऑफ-वे (Right of Way) को दैनिक वाहनों की संख्या से जोड़ा गया है:

  • 15,000 वाहनों तक प्रतिदिन: ऐसे कॉरिडोर्स के लिए 4-लेन राजमार्ग और 4-लेन संरचनाओं (पुल, फ्लाईओवर) के साथ कुल 60 मीटर चौड़ाई का प्रावधान रखा गया है।
  • 15,000 से 25,000 वाहनों तक प्रतिदिन: यहाँ 4-लेन राजमार्ग बनाए जाएंगे, लेकिन भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए ओवरब्रिज और फ्लाईओवरों की संरचना 6-लेन क्षमता की रखी जाएगी। इसके लिए 70 मीटर चौड़ाई तय की गई है।
  • 25,000 से 40,000 वाहनों तक प्रतिदिन: इन उच्च दबाव वाले मार्गों पर 6-लेन राजमार्ग और 6-लेन संरचनाओं के साथ कुल 70 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाएगा।

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2. हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए विशेष सुरक्षा और एग्जिट निर्देश

उच्च गति से चलने वाले वाहनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइडलाइंस में कई सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए गए हैं:

  • अग्रिम सूचना (Advance Notification): ड्राइवरों को अचानक मुड़ने या दुर्घटनाओं से बचाने के लिए प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) बिंदुओं से काफी पहले डिजिटल और सांकेतिक बोर्ड्स के माध्यम से अग्रिम सूचना दी जाएगी।
  • इंटरचेंज और रैंप निर्माण: एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और प्रमुख धमनियों (Arterial Roads) के मिलन बिंदुओं पर केवल समर्पित रैंप वाले इंटरचेंज दिए जाएंगे ताकि सीधा ट्रैफिक प्रभावित न हो।
  • बाउंड्री वॉल का निर्माण: अनाधिकृत प्रवेश और मवेशियों (Stray Cattle) को राजमार्ग पर आने से रोकने के लिए दोनों तरफ कम से कम 1 मीटर ऊंची सुरक्षा दीवारें (Boundary Walls) या बाड़ लगाई जाएगी।

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निष्कर्ष 

एनएचएआई द्वारा जारी ये नए मानक न केवल भारत में एक्सप्रेसवे और आम राजमार्गों के बीच के अंतर को समाप्त करेंगे, बल्कि चालकों को एक सुरक्षित, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का ड्राइविंग अनुभव प्रदान करेंगे। मानकीकृत डीपीआर निर्माण से देश भर की अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी आएगी और रसद (लॉजिस्टिक्स) परिवहन में लगने वाले समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।

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द्वारा Kanchan

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