चुनाव आयोग का बड़ा अभियान: ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत मतदाता विवरणों की जांच तेज, गड़बड़ी पर जारी हो रहे नोटिस
देशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) कर रहे डोर-टू-डोर सत्यापन; फर्जी, दोहरे और स्थानांतरित नामों को हटाने तथा नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए नोटिस व सुनवाई का दौर जारी।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर की मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत, चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) द्वारा उन मतदाताओं को आधिकारिक नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनके विवरण में विसंगतियां, दोहरी प्रविष्टियां या पते के सत्यापन में अस्पष्टता पाई गई है।
लगभग दो दशकों (2002-2004 के बाद) के अंतराल पर आयोजित किए जा रहे इस ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ का मुख्य उद्देश्य शहरीकरण, लगातार हो रहे प्रवासन और मृत मतदाताओं के नाम न हटने के कारण मतदाता सूचियों में आई खामियों को दूर करना है। यह सामान्य वार्षिक संशोधन से अलग एक गहन प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत पूरी तरह वैध ठहराया है।
1. नोटिस फेज और सत्यापन की प्रक्रिया
प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) के प्रकाशन के बाद ‘दावे और आपत्तियां’ (Claims & Objections) अवधि के दौरान नोटिस चरण संचालित किया जा रहा है:
- किन मामलों में जारी हो रहे नोटिस: यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर पाया जाता है, पते में स्थायी बदलाव हुआ है, या मैपिंग के दौरान विवरण मेल नहीं खाते, तो ERO द्वारा धारा 15/22 के तहत नोटिस जारी किया जा रहा है।
- सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन: नोटिस प्राप्त होने पर मतदाता अपने बीएलओ (BLO) के माध्यम से या सीधे ERO/AERO कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पहचान पत्र, निवास प्रमाण या गणना फॉर्म (Enumeration Form) जमा कर सत्यापन करा सकते हैं।
2. बीएलओ (BLO) का घर-घर दौरा और ‘प्रोजीनी मैपिंग’
इस अभियान के तहत देशभर में लाखों बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर पूर्व-मुद्रित गणना फॉर्म (Enumeration Forms) बांट रहे हैं और विवरणों का मिलान कर रहे हैं:
- सेल्फ मैपिंग एवं प्रोजीनी मैपिंग: मतदाता 2002-2004 के पिछले SIR डेटाबेस के आधार पर अपने स्वयं के नाम या अपने माता-पिता/दादा-दादी के रिकॉर्ड का मिलान (Progeny Mapping) कर सकते हैं।
- डिजिटल विकल्प: मतदाता आयोग के पोर्टल (voters.eci.gov.in) या मोबाइल ऐप के माध्यम से भी स्वयं ऑनलाइन फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट की मुहर और गलत विलोपन से सुरक्षा मानक
वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि आयोग का कर्तव्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। आयोग ने गलती से नाम कटने से रोकने के लिए कई सुरक्षा मानक लागू किए हैं:
- रैंडम ऑडिट और पर्यवेक्षण: हटाए गए नामों का रैंडम सैंपल ऑडिट और उच्च अधिकारियों द्वारा क्रास-वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
- अपील का अधिकार: ERO के निर्णय के खिलाफ मतदाता पहली अपील संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास और दूसरी अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास दर्ज करा सकते हैं।
निष्कर्ष
निर्वाचन आयोग का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि आपको बीएलओ द्वारा कोई नोटिस या सत्यापन फॉर्म प्राप्त होता है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेजों का सत्यापन अवश्य कराएं, ताकि आगामी चुनावों में आपका मताधिकार सुरक्षित रहे।

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