ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बाद अमेरिका और डेनमार्क में हुआ ये समझौता

महीनों तक ग्रीनलैंड पर सैन्य ताकत से कब्जा करने की धमकी देने के बाद अमेरिका ने डेनमार्क के साथ एक बड़ा सुरक्षा समझौता किया है। जानें इस “ग्रीनलैंड एकॉर्ड” की पूरी शर्तें और इसके मायने।

Greenland News,ग्रीनलैंड पर अमेरिका कब्जा क्यों करना चाहता है, डोनाल्ड ट्रंप का असली मकसद क्या है? - why trump want to takeover greenland us motive behind to acquire denmark autonomous ...

आर्कटिक क्षेत्र की सबसे बड़ी सामरिक बहस अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महीनों तक ग्रीनलैंड को ताकत के दम पर हासिल करने की धमकी देने के बाद आखिरकार डेनमार्क के साथ एक समझौता कर लिया है। 18 सितंबर 2026 को घोषित इस समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर “स्थायी नियंत्रण” मिल गया है, लेकिन यह द्वीप औपचारिक रूप से डेनमार्क के अधीन ही बना रहेगा। यह समझौता अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में तीनों पक्षों — अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड — के बीच औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाना है।

धमकी से समझौते तक का सफर

यह विवाद जनवरी 2025 में उस समय शुरू हुआ था, जब ट्रंप ने बार-बार यह दावा किया कि रूस और चीन की सैन्य ताकतें ग्रीनलैंड के तटों के आसपास मंडरा रही हैं और अमेरिका को इन खतरों को रोकने के लिए इस द्वीप पर नियंत्रण चाहिए। इस दौरान अमेरिका पर ग्रीनलैंड में अलगाववाद और कब्जे को बढ़ावा देने के लिए गुप्त अभियान चलाने के आरोप भी लगे, जिसके चलते डेनमार्क ने अमेरिकी राजनयिक को तलब तक किया था। कोपेनहेगन की सड़कों पर “हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड” जैसे प्रदर्शन भी हुए, और यूरोप के कई देशों ने डेनमार्क के समर्थन में खुलकर बयान दिए। बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और नॉर्वे समेत कई नाटो सदस्य देशों ने इस दौरान डेनमार्क की संप्रभुता के समर्थन में आवाज उठाई थी।

समझौते में क्या-क्या शामिल है

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस समझौते को “अनंत काल तक चलने वाला” करार दिया और कहा कि इससे अमेरिका की सभी चिंताएं पूरी तरह दूर हो गई हैं, और यह सब अमेरिका को “बिना किसी लागत” के हासिल हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी पहुंच, सैन्य अड्डे बनाने और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल का अधिकार मिलेगा, साथ ही वहां प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसी परियोजनाओं के लिए नए ढांचे बनाने की छूट भी होगी। एक अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी के मुताबिक इस समझौते में यह भी साफ किया गया है कि ग्रीनलैंड में कोई भी गैर-नाटो देश सैन्य अड्डा नहीं बना सकेगा, और चीन-रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों को वहां बिना अमेरिका की लिखित मंजूरी के कोई भी संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे “ऐतिहासिक समझौता” और अमेरिका के लिए “बड़ी जीत” बताया।

Greenland Security Deal,'स्थायी सैन्य पहुंच, नए आर्मी बेस,' डोनाल्ड ट्रंप की डेनमार्क से डील, क्या ग्रीनलैंड पर होने जा रहा अमेरिका का कब्जा? - us denmark ...

डेनमार्क और ग्रीनलैंड की अलग व्याख्या

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और डेनमार्क दोनों ही इस समझौते को बिल्कुल अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं। जहां ट्रंप इसे अपनी क्षेत्रीय जीत के तौर पर देख रहे हैं, वहीं डेनमार्क और ग्रीनलैंड इसे अपनी संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि के रूप में देख रहे हैं। डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा कि यह समझौता ग्रीनलैंड और डेनमार्क, दोनों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देता है। समझौते के इस चौथे स्तंभ में डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड की स्वशासन व्यवस्था को कायम रखते हुए द्वीप की खरीद या उस पर कब्जे को पूरी तरह खारिज किया गया है। ग्रीनलैंड सरकार के मुखिया येंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी इसे “सभी के हित में” बताते हुए कहा कि यह समझौता ग्रीनलैंड, डेनमार्क, अमेरिका और पश्चिमी गठबंधन, सभी की सुरक्षा को मजबूत करता है।

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की NATO से डील! अमेरिका के कब्जे में आएगा डेनमार्क का ये हिस्सा? जानें 4 सवाल और जवाब | Donald Trump Deal with Nato on Greenland US expansionism Europe

ग्रीनलैंड इतना अहम क्यों है

ग्रीनलैंड की भू-राजनीतिक अहमियत पिघलती समुद्री बर्फ से सीधे जुड़ी हुई है। बर्फ पिघलने के साथ यहां नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं और खनिज संपदा भी उजागर हो रही है, जिससे यह क्षेत्र मिसाइल रक्षा और निगरानी तंत्र के लिहाज़ से बेहद अहम हो गया है। हालांकि विश्लेषकों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि यह पूरा समझौता एक ऐसे नाटो सहयोगी देश पर सैन्य कब्जे और सेना हटाने की धमकियों के बीच हुआ है, जो नाटो गठबंधन के भीतर आगे चलकर एक असहज मिसाल कायम कर सकता है।

अन्य जानकारी !

द्वारा Kanchan

One thought on “ग्रीनलैंड कब्जे की धमकी के बाद अमेरिका-डेनमार्क में ऐतिहासिक सुरक्षा समझौता”
  1. […] ने 1 लाख डॉलर की फीस एक साल और बढ़ाई ग्रीनलैंड कब्जे की धमकी के बाद अमेरिक… हिमालय पर टिकी भारत की 21.5% GDP: ग्लेशियर […]

Comments are closed.

You missed