जनता दल यूनाइटेड में हलचल: नाम बदलने की मांग और UCC पर नीतीश कुमार की पार्टी का रुख साफ करने वाली है 18 सितंबर की बैठक
बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) एक साथ दो बड़े मुद्दों को लेकर सुर्खियों में है — पार्टी का नाम बदलने की मांग, और समान नागरिक संहिता (UCC) पर उसका स्टैंड। दोनों ही मुद्दों पर अब सबकी नजरें 18 सितंबर को पटना में होने वाली पार्टी की अहम बैठक पर टिकी हुई हैं।
नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं
गौरतलब है कि नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं हैं। नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन इसके कुछ महीने बाद ही उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला किया। 5 मार्च 2026 को उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, और 14 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपने करीब दो दशक लंबे कार्यकाल का अंत किया। इसके बाद वे राज्यसभा सांसद के तौर पर केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनकी भूमिका बरकरार है। फिलहाल बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार काम कर रही है।
पार्टी का नाम बदलने की मांग ने पकड़ा जोर
बीते कुछ दिनों से JDU में पार्टी का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की मांग जोर पकड़ रही है। यह प्रस्ताव सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की तरफ से सामने आया था। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को पार्टी के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी प्रवक्ता उमेश कुशवाहा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ शब्दों में लिखा कि “जेडीयू मतलब नीतीश कुमार” है। हालांकि विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस मांग पर तंज कसा है — पार्टी के विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि आने वाले एक-दो महीनों में JDU पूरी तरह बिखर जाएगी, और जब पार्टी में बहुत कम लोग बचेंगे, तभी उसका नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ रखा जाएगा।
UCC को लेकर JDU में अलग-अलग सुर
नाम बदलने की चर्चा के साथ-साथ समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी JDU में मतभेद खुलकर सामने आए हैं। भाजपा के मुख्य एजेंडे में शामिल इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी राय एक जैसी नहीं है। जहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना, चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा जैसे सहयोगी दल केंद्र सरकार के रुख के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं JDU के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि बिहार जैसे विविधतापूर्ण राज्य में समान नागरिक संहिता को स्वीकार करना आसान नहीं होगा।
18 सितंबर की बैठक पर टिकीं नजरें
इसी बीच नीतीश कुमार ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को 18 सितंबर को पटना में होने वाले एक दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया है। पार्टी की तरफ से आधिकारिक तौर पर इसे विधायी कार्य और सदन की प्रक्रियाओं से जुड़ा सामान्य कार्यक्रम बताया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे UCC पर JDU के रुख को स्पष्ट करने वाली एक अहम बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। इस बैठक से ठीक पहले नीतीश कुमार के आवास पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा भी देखा गया, जिनमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी जैसे नाम शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार इन नेताओं की बंद कमरे में हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ा दी है।
नीतीश कुमार की सामाजिक सक्रियता भी जारी
राजनीतिक हलचल के बीच नीतीश कुमार अपनी सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने बिहार के नालंदा स्थित महाबोधि महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन और चार-वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP) का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि विकसित और समृद्ध बिहार का रास्ता शिक्षित बिहार से होकर ही गुजरेगा, जो शिक्षा क्षेत्र को लेकर उनकी दीर्घकालिक प्राथमिकता को दर्शाता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल यह साफ नहीं है कि 18 सितंबर की बैठक में पार्टी नाम बदलने के प्रस्ताव पर कोई औपचारिक फैसला होगा या नहीं, लेकिन UCC को लेकर पार्टी का रुख जरूर स्पष्ट होने की उम्मीद है। बिहार की राजनीति पर करीबी नजर रखने वालों के लिए यह हफ्ता खासा अहम साबित हो सकता है, क्योंकि इससे न सिर्फ JDU की आंतरिक दिशा तय होगी, बल्कि NDA गठबंधन के भीतर की खींचतान भी और स्पष्ट होकर सामने आ सकती है।
