Breaking News: US Russia Sanctions Bill आगे बढ़ा, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा मंडराया!
अमेरिका में रूस के खिलाफ सबसे बड़े प्रतिबंध बिलों में से एक अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) ने रूस पर सख्त प्रतिबंधों वाले इस बिल को आगे बढ़ाते हुए इस पर वोटिंग का रास्ता साफ कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बिल में भारत का नाम सीधे तौर पर उन देशों में शामिल किया गया है, जिन पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और भारत के लिए इसके क्या मायने हो सकते हैं।
क्या है यह बिल
इस बिल का आधिकारिक नाम “लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” है, जिसे दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर तैयार किया था। यह बिल अमेरिकी सीनेट में 7 अगस्त 2026 को भारी बहुमत से पास हुआ था, जहां इसके पक्ष में 86 और विरोध में सिर्फ 11 वोट पड़े थे। अब यह बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सामने है, जहां हाउस रूल्स कमेटी ने इसे आगे बढ़ाते हुए वोटिंग के लिए रास्ता साफ कर दिया है।
भारत का नाम सीधे तौर पर शामिल
सीनेट से पास हुए मूल बिल में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था, बल्कि इसमें रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों और रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर की तरफ से पेश किए गए एक संशोधन में साफ तौर पर 10 देशों के नाम गिनाए गए हैं, जो इस 100 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में शुरुआत में आ सकते हैं — चीन, भारत, तुर्की, अज़रबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कज़ाखस्तान और किर्गिज़ गणराज्य। हालांकि गौरतलब है कि रूसी हाइड्रोकार्बन के सबसे बड़े खरीदारों में चीन, भारत और तुर्की का नाम पहले से ही सबसे ऊपर गिना जाता रहा है। अतः यह कहा जा सकता है कि ये ‘US Russia Sanctions Bill’ चिंता का विषय बनता जा रहा है।
बिल में और क्या-क्या शामिल है?
इस प्रतिबंध पैकेज के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार मिलेगा कि वे रूसी तेल और गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें। हालांकि उन देशों को छूट दी गई है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। इसके अलावा इस बिल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ रूसी राजनीतिक और सैन्य नेताओं, रूसी वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। बिल में उन पुराने और फर्जी झंडे लगाकर चलने वाले तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है, जिनका इस्तेमाल रूस मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए करता आया है। साथ ही इसमें ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने का प्रावधान जोड़ा गया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर बिल में शामिल किया गया।
राष्ट्रपति को छूट देने का भी प्रावधान
बिल में एक अहम प्रावधान यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास किसी भी देश या इकाई को प्रतिबंधों या शुल्कों से छूट देने की शक्ति होगी, बशर्ते वे अमेरिकी कांग्रेस को लिखित रूप में यह प्रमाणित करें कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यही वजह है कि विश्लेषक इसे “बारगेनिंग लीवर” के तौर पर देख रहे हैं — यानी असली सवाल यह नहीं कि बिल में कितना टैरिफ अधिकृत किया गया है, बल्कि यह है कि राष्ट्रपति इस शक्ति का वास्तव में कितना और कैसे इस्तेमाल करते हैं।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता
अगर यह बिल हाउस में पास होकर कानून बनता है, तो भारत के लिए इसके दोहरे झटके हो सकते हैं। पहला, भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात पर सीधे तौर पर भारी टैरिफ का खतरा मंडरा सकता है, और यह ऐसे समय पर हो रहा है जब दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दूसरा, भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल से हटकर दूसरे स्रोतों की तरफ रुख करना पड़ सकता है, जो पहले से ही तंग वैश्विक तेल बाजार में महंगा साबित हो सकता है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब भारत को रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ रहा है — अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीद के चलते भारत पर पहले ही 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे भारत पर कुल टैरिफ बोझ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
अमेरिकी संसद में भी मतभेद
हालांकि इस बिल को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच भी राय एक जैसी नहीं है। कई शीर्ष डेमोक्रेट सांसदों ने चिंता जताई है कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ लगाने की शक्तियों को नाटकीय रूप से बढ़ा देगा, और आशंका जताई है कि इस नई शक्ति का इस्तेमाल अमेरिका के सहयोगी देशों के खिलाफ भी किया जा सकता है। दूसरी तरफ, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से इस बिल को पास करने की अपील की है, उनका कहना है कि रूस पर अभी और सख्त प्रतिबंध लगाए जाने जरूरी हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल हाउस रूल्स कमेटी ने बिल को आगे बढ़ा दिया है, और जल्द ही इस पर प्रतिनिधि सभा में औपचारिक वोटिंग होने की उम्मीद है। हालांकि इसके पास होने की संभावनाओं को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। भारत के लिए फिलहाल स्थिति सतर्कता बनाए रखने वाली है, और नई दिल्ली की नजरें अब वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी रहेंगी।
नोट: यह एक विकसित हो रही खबर है, इसमें आगे अपडेट संभव है।

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