सर्जियो गोर का बड़ा बयान, भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द फाइनल होने की उम्मीद; मार्को रुबियो आएंगे भारत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 15 अक्टूबर 2026 को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और इसके पूरा होने की उन्हें उम्मीद है। गोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी समझौते के पहले चरण को अंतिम कानूनी मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में बताया है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनकी यात्रा में व्यापार, ऊर्जा सहयोग और कारोबारी संबंध प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या कहा?
सर्जियो गोर ने एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता बहुत करीब है और अंततः इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने दोनों देशों को महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बताते हुए उम्मीद जताई कि समझौता दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।
गोर के मुताबिक, बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन समझौते की जटिलता और कानूनी प्रक्रिया के कारण अभी कुछ काम बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद समझौते को दोबारा व्यवस्थित करने की जरूरत पड़ी।
हालांकि, अमेरिकी राजदूत का बयान समझौते पर हस्ताक्षर होने की आधिकारिक घोषणा नहीं है। अंतिम समझौते और उसके लागू होने की स्थिति दोनों देशों की औपचारिक घोषणाओं से ही स्पष्ट होगी।
पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते पर क्या बताया?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 15 अक्टूबर को बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण अंतिम मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि भारत समझौते को जल्द पूरा करना चाहता है, लेकिन भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले उचित व्यापारिक लाभ मिलना जरूरी है।
भारत की चिंता यह है कि अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।
फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच बनी रूपरेखा के तहत अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात सामने आई थी। हालांकि, वार्ता में अब भी कुछ मुद्दे बाकी हैं। भारत चाहता है कि अंतिम समझौता उसके निर्यातकों को पर्याप्त बाजार पहुंच और शुल्क संबंधी स्थिरता प्रदान करे।
मार्को रुबियो 17 अक्टूबर से भारत दौरे पर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर 2026 तक भारत और उज्बेकिस्तान की यात्रा पर रहेंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, भारत दौरे में कारोबारी संबंधों और ऊर्जा सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
गोर ने बताया कि रुबियो मुंबई में भारतीय सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और दिल्ली से आने वाले अन्य अधिकारियों के उनसे मिलने की उम्मीद है। इसके बाद रुबियो गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। गोर ने कहा कि रिलायंस के प्रमुख मुकेश अंबानी की बैठक में मौजूद रहने की भी उम्मीद है।
इस यात्रा में ऊर्जा क्षेत्र का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के साथ-साथ तेल, निवेश और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं।
सर्जियो गोर के बयान पर कांग्रेस ने क्या सवाल उठाए?
रुबियो की प्रस्तावित यात्रा का विवरण सर्जियो गोर द्वारा सार्वजनिक किए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूछा कि भारत के विदेश मंत्री की घरेलू बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी अमेरिकी राजदूत क्यों दे रहे हैं, जबकि सामान्य तौर पर ऐसी जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की जाती है।
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया सरकारी संवाद और राजनयिक घोषणाओं से जुड़ी है। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष ने रुबियो की यात्रा और प्रस्तावित बैठकों की जानकारी साझा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से औपचारिक कार्यक्रम की पुष्टि को अलग से देखना जरूरी है।
रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी शुल्क की चुनौती
व्यापार समझौते की वार्ता के बीच रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई का मुद्दा भी बना हुआ है। अमेरिकी कानून से रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है। सर्जियो गोर ने कहा कि इस संबंध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले दस दिनों में फैसला ले सकते हैं।
इस मुद्दे का भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर क्या असर होगा, यह अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल दोनों देश व्यापार समझौते को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन शुल्क, ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसे विषय वार्ता के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, सर्जियो गोर के ताजा बयान से व्यापार समझौते पर प्रगति के संकेत मिलते हैं। फिर भी, जब तक दोनों देश आधिकारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर और उसके लागू होने की घोषणा नहीं करते, इसे अंतिम समझौता नहीं माना जा सकता।

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